संक्षेप:
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने केंद्र सरकार को इसका पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा है। साथ ही, अब नई कारों के लिए 4 साल और बाइक्स के लिए 6 साल का अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा लेना होगा। ट्रोल पंपों और मुख्य मार्गों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे। देश की सड़कों पर दौड़ने वाली करीब 56% गाड़ियों का कोई बीमा ही नहीं है।
बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के ईंधन पर रोक, नई गाड़ियों की बीमा अवधि बढ़ी
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने केंद्र सरकार को एक सख्त निर्देश दिया है। इसके तहत पेट्रोल पंपों को वाहनों के वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस से जोड़ा जाएगा। यदि गाड़ी का बीमा नहीं है, तो उसे पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। इसके अलावा, कोर्ट ने नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के समय लिए जाने वाले अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की समयसीमा भी 1 साल बढ़ा दी है। साल 2018 के नियमों में बदलाव करते हुए, अब नई कार के लिए 3 की जगह 4 साल और नई बाइक/स्कूटी के लिए 5 की जगह 6 साल का इंश्योरेंस लेना अनिवार्य होगा।
ANPR कैमरों और मोबाइल ऐप से होगी ऑटोमैटिक चेकिंग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDA) और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) मिलकर इस पायलट प्रोजेक्ट पर काम करेंगे। पेट्रोल पंपों और मुख्य मार्गों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे, जो इंश्योरेंस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (IIB) और वाहन (VAHAN) पोर्टल से जुड़े होंगे। पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने भी इस पर सहमति जता दी है। वहीं, राज्य पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस और मोबाइल ऐप दिए जाएंगे, जिससे वे रियल-टाइम में बीमा स्टेटस चेक कर तुरंत ई-चालान (E-challan) काट सकें।
देश की 56% गाड़ियाँ बिना बीमा के, पीड़ितों को मुआवजे का संकट
सुप्रीम कोर्ट ने यह कड़ा कदम इसलिए उठाया है क्योंकि स्टैंडिंग कमेटी ऑन फाइनेंस (2024-25) की रिपोर्ट के अनुसार, देश की सड़कों पर दौड़ने वाली करीब 56% गाड़ियों का कोई बीमा ही नहीं है। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य है, लेकिन इसके अभाव में सड़क दुर्घटना के पीड़ितों को समय पर उचित मुआवजा मिलने में सालों लग जाते हैं। इसके समाधान के लिए कोर्ट ने IRDA को निर्देश दिया है कि प्राइवेट वाहन मालिकों को बेस कवर के साथ पर्सनल एक्सीडेंट, एड-ऑन और ओन-डैमेज जैसे कस्टमाइज्ड विकल्प भी उपलब्ध कराए जाएं।
टोल प्लाजा पर रुकने का झंझट भी होगा खत्म
हादसों और हाईवे पर लगने वाली लंबी कतारों को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने टोल प्लाजा के लिए भी निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार को चुनिंदा कॉरिडोर पर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने को कहा गया है, जिसमें वाहनों को टोल पर रोकने की प्रक्रिया खत्म कर उसे ऑटोमैटिक डिटैक्शन सिस्टम (ANPR) से बदला जाएगा, ताकि गाड़ियां बिना रुके सीधे गुजर सकें।