उत्तराखंड के 4 बर्फीले जिलों (उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़ और रुद्रप्रयाग) में 1 सितंबर 2026 से घर-घर जाकर जनगणना का काम शुरू होगा। ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन में महज 290 लोगों के शामिल होने के बाद, अब 162 प्रगणक करीब 52 हजार लोगों की गिनती करेंगे। पूरी तरह डिजिटल इस जनगणना के दूसरे चरण में पहली बार लोगों से उनकी जाति भी पूछी जाएगी। इस विशेष अभियान में उत्तरकाशी के 69, चमोली के 23, पिथौरागढ़ के 35 और रुद्रप्रयाग के 4 गांवों को शामिल किया गया है।
उत्तराखंड के बर्फीले इलाकों में घर-घर गणना की शुरुआत
उत्तराखंड के दुर्गम और ऊंचाई वाले बर्फीले क्षेत्रों में 1 सितंबर 2026 से जनगणना-2027 के दूसरे चरण यानी 'पॉपुलेशन एन्यूमरेशन' (PE) का आगाज होने जा रहा है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण इन इलाकों तक पहुंचना लगभग नामुमकिन हो जाता है, इसी चुनौती को देखते हुए राज्य के सामान्य क्षेत्रों (जहां गणना फरवरी 2027 में प्रस्तावित है) से पहले ही यहां घर-घर जाकर गिनती का काम पूरा किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस विशेष अभियान में उत्तरकाशी के 69, चमोली के 23, पिथौरागढ़ के 35 और रुद्रप्रयाग के 4 गांवों को शामिल किया गया है। इसके अलावा गंगोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ के निवासियों की भी गिनती होगी। इन 131 गांवों और 3 कस्बों की करीब 52 हजार आबादी तक पहुंचने के लिए 162 प्रगणकों और 34 सुपरवाइजरों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सिर्फ 290 लोगों ने किया सेल्फ-एन्यूमरेशन
इससे पहले 17 से 31 अगस्त तक इन विशेष इलाकों के निवासियों को घर बैठे ऑनलाइन 'सेल्फ-एन्यूमरेशन' के जरिए खुद आंकड़े दर्ज कराने की सुविधा दी गई थी, लेकिन यह प्रयोग ज्यादा सफल नहीं रहा। शुक्रवार तक महज 290 लोगों ने ही इस सुविधा का इस्तेमाल किया। अधिकारियों के मुताबिक, इस खराब प्रतिक्रिया की मुख्य वजह कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और लोगों का लंबा प्रवास है। चरवाहा समुदाय के लोग मौसम के अनुसार अपनी जगह बदलते रहते हैं, जिससे ऑनलाइन पंजीकरण व्यावहारिक नहीं हो सका। अब तय किया गया है कि प्रगणक खुद लोगों के घर पहुंचेंगे और ऐप के माध्यम से जानकारी दर्ज करेंगे।
पहली बार पूछी जाएगी जाति, प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल
यह जनगणना कई मायनों में ऐतिहासिक बदलाव लेकर आई है। यह पहली बार है जब पूरी गणना कागजों की बजाय मोबाइल ऐप (PE App) के जरिए 100% डिजिटल तरीके से पूरी की जा रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि केंद्र के फैसले के अनुसार, जनगणना के इस दूसरे चरण में पहली बार लोगों से उनकी जाति से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार, इन क्षेत्रों में 1 से 30 सितंबर तक आबादी की गिनती चलेगी। इसके बाद अगर कोई छूट गया हो या सुधार की जरूरत हो, तो उसके लिए 1 से 5 अक्टूबर तक 'रिविजनल राउंड' आयोजित किया जाएगा। इन बर्फीले इलाकों के लिए जनगणना की संदर्भ तिथि (रेफरेंस डेट) 1 अक्टूबर 2026 की रात 12 बजे निर्धारित की गई है।
16 साल के लंबे अंतराल के बाद हो रही गिनती
गौरतलब है कि उत्तराखंड में पिछली आधिकारिक जनगणना साल 2011 में संपन्न हुई थी। नियमानुसार अगली जनगणना 2021 में होनी थी, जिसके लिए मकान सूचीकरण का काम अप्रैल 2020 और जनसंख्या गणना फरवरी 2021 में प्रस्तावित थी। लेकिन कोरोना महामारी के कारण पूरी प्रक्रिया को स्थगित करना पड़ा था। अब वही रुकी हुई प्रक्रिया 'जनगणना-2027' के नाम से कराई जा रही है। इसी देरी के कारण राज्य के सामान्य इलाकों में पिछली और नई जनगणना के बीच करीब 16 साल का एक लंबा फासला आ जाएगा। केंद्र ने उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के बर्फीले क्षेत्रों के लिए भी इसी तरह का अलग समय निर्धारित किया है।
