संक्षेप:
उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम के निर्देशानुसार, गढ़वाल और कुमाऊं मंडलायुक्त अगले 15 दिनों तक 4 जिलों में कैंप करेंगे। जहां वोटर जोड़ने (फॉर्म-6) के 4% और हटाने (फॉर्म-7) के 2% से अधिक आवेदन आए हैं, वहां हर फॉर्म की जमीनी स्तर पर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) द्वारा क्रॉस-चेकिंग की जाएगी।
15 दिनों तक मैदान में उतरेंगे मंडलायुक्त, मतदाता सूची की होगी क्रॉस-चेकिंग
देहरादून स्थित सचिवालय में सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान की समीक्षा की। इस बैठक में स्पष्ट किया गया कि मतदाता सूची का यह सत्यापन अब केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, अगले 15 दिनों तक मंडलायुक्त अपने आवंटित जिलों में कैंप करेंगे और ज्यादा आवेदन वाले बूथों पर खुद पहुंचकर फील्ड वेरिफिकेशन करेंगे।
इन 4 जिलों पर रहेगा विशेष फोकस, डीएम भी करेंगे रेंडम चेकिंग
समीक्षा बैठक के दौरान सीईओ द्वारा कुमाऊं मंडलायुक्त को नैनीताल और ऊधमसिंह नगर की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि गढ़वाल मंडलायुक्त देहरादून और हरिद्वार में कैंप करेंगे। इसके अतिरिक्त, जिलाधिकारियों को भी निर्देशित किया गया है कि वे अचानक (रेंडम) फील्ड विजिट करें। डीएम खुद बूथों का निरीक्षण कर यह जांचेंगे कि फाइलों में दर्ज आवेदनों और जमीनी स्थिति में कितनी समानता है।
4% और 2% का नियम: तय मानक पार करने पर हर फॉर्म की होगी जांच
आयोग की ओर से SIR के तहत निगरानी के सख्त पैमाने तय किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, उन बूथों पर सबसे ज्यादा फोकस रहेगा जहां मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के भारी संख्या में दावे-आपत्तियां प्राप्त हुई हैं। नियमों के मुताबिक, यदि किसी बूथ पर नाम जोड़ने के लिए 'फॉर्म-6' के आवेदन 4% से अधिक आते हैं, या नाम हटाने के लिए 'फॉर्म-7' के आवेदन 2% से अधिक आते हैं, तो वहां इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) को हर एक फॉर्म की दोबारा जांच (क्रॉस-वेरिफिकेशन) करनी होगी।
समय पर निस्तारण और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है मुख्य उद्देश्य
इस फील्ड वेरिफिकेशन का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी बनाना है। मौके पर जाकर जांच करने से यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी का गलत नाम तो नहीं जुड़ा, किसी पात्र मतदाता का नाम कटा तो नहीं, या फिर एक ही पते पर असामान्य संख्या में आवेदन तो नहीं आए हैं। साथ ही, बैठक में सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 के तहत मिले दावों और आपत्तियों की नियमानुसार जांच करें और तय समयसीमा के भीतर उनका निस्तारण सुनिश्चित करें। अब SIR की पूरी प्रक्रिया फाइलों से निकलकर सीधे बूथों पर परखी जाएगी।