उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित कैब, डिलीवरी और लॉजिस्टिक सेवाओं की मनमानी रोकने के लिए योगी सरकार ने अब मोटरयान नियमावली-2026 लागू कर दी है। इसके तहत बुकिंग रद्द करने पर जुर्माना, किराये में अधिकतम 50 प्रतिशत तक ही सर्ज प्राइसिंग, चालकों को ₹10 लाख का बीमा और upmyfleet.com पोर्टल से प्रदूषण निगरानी अनिवार्य की गई है। यदि कैब चालक बुकिंग स्वीकार करने के बाद बिना किसी उचित कारण के यात्री को पिकअप करने नहीं पहुंचता है, तो उस पर ₹100 का अर्थदंड लगाया जाएगा।
मनमाने किराये पर रोक और यात्रियों के लिए तय हुए कड़े नियम
जारी नियमावली के अनुसार, ऐप आधारित कैब सेवाओं में मांग बढ़ने पर होने वाली मनमानी वसूली पर सख्त अंकुश लगाया गया है। नई नीति के तहत कंपनियां बेस फेयर से अधिकतम 50 प्रतिशत तक ही किराया बढ़ा सकेंगी। इसके अलावा, यदि कैब चालक बुकिंग स्वीकार करने के बाद बिना किसी उचित कारण के यात्री को पिकअप करने नहीं पहुंचता है, तो उस पर ₹100 का अर्थदंड लगाया जाएगा। इस जुर्माने की राशि का सीधा लाभ यात्री को उसकी अगली यात्रा (ट्रिप) में छूट के रूप में दिया जाएगा। साथ ही, यात्रा के दौरान प्रत्येक यात्री का बीमा कराना भी एग्रीगेटर कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
ड्राइवरों के लिए स्वास्थ्य-टर्म बीमा और पुलिस सत्यापन अनिवार्य
नई नीति में ड्राइवरों की सामाजिक सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। एग्रीगेटर से जुड़ने वाले सभी चालकों का पुलिस और चरित्र सत्यापन अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही ड्राइवरों का समय-समय पर मनोवैज्ञानिक परीक्षण और रिफ्रेशर ट्रेनिंग भी कराई जाएगी। नीति के तहत चालकों के कल्याण के लिए ₹5 लाख का स्वास्थ्य बीमा और ₹10 लाख का टर्म इंश्योरेंस प्रदान करने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। यात्रियों की समस्याओं के समयबद्ध समाधान के लिए हर कंपनी को अनिवार्य रूप से ग्रिवांस रिड्रेसल ऑफिसर (शिकायत निवारण अधिकारी) तैनात करना होगा।
डिलीवरी सेवाएं भी दायरे में, ₹5 लाख लाइसेंस फीस और जमानत राशि तय
यह नई व्यवस्था केवल पैसेंजर कैब तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्सल, कूरियर और ई-कॉमर्स डिलीवरी करने वाले सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इसके दायरे में आएंगे। एग्रीगेटर कंपनियों के लिए ₹25,000 आवेदन शुल्क और ₹5 लाख लाइसेंस फीस निर्धारित की गई है। इसके अलावा वाहनों की संख्या के आधार पर जमानत राशि तय की गई है:
- 100 बस या 1,000 अन्य वाहनों तक: ₹10 लाख
- 1,000 बस या 10,000 अन्य वाहनों तक: ₹25 लाख
- 1,000 से अधिक बस या 10,000 से अधिक अन्य वाहनों पर: ₹50 लाख
NCR में प्रदूषण निगरानी और 3.15 लाख से अधिक वाहन पोर्टल पर दर्ज
नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने के साथ-साथ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में वाहनों के प्रदूषण पर विशेष नजर रखी जाएगी। इसके लिए शुरू किए गए 'upmyfleet.com' पोर्टल के जरिए पेट्रोल-डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) में बदलने की प्रक्रिया को ट्रैक किया जाएगा। जानकारी के अनुसार, वर्तमान में NCR क्षेत्र के दो प्रमुख एग्रीगेटर और उनके 3,15,218 वाहन इस पोर्टल पर ऑनबोर्ड हो चुके हैं, जिससे नियमों के अनुपालन और फ्लीट ट्रांजिशन की डिजिटल मॉनिटरिंग की जा सकेगी।
