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आम ग्राहकों के लिए यूपीआई रहेगा पूरी तरह फ्री : ₹2,000 से अधिक के ट्रांजेक्शन पर बड़े मर्चेंट्स पर लग सकता है शुल्क

सारांश 

भारत में रोजाना फल-सब्जी खरीदने से लेकर कैब के किराए तक के लिए करोड़ों लोग यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल करते हैं। संसद में पेश नए संशोधन बिल के बाद यूपीआई पर शुल्क लगने की चर्चाएं तेज हो गई थीं। हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट कर दिया है कि आम ग्राहकों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, यूपीआई पेमेंट उनके लिए पूरी तरह मुफ्त ही रहेगा। भविष्य में ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई लेन-देन पर 0.3% से 0.5% तक का एमडीआर शुल्क लगाया जा सकता है।


संसद में पेश नए संशोधन बिल से शुरू हुआ पूरा विवाद

सरकार ने हाल ही में संसद में 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल-2026' पेश किया है। इसमें 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट-2007' की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। इस संशोधन के तहत भविष्य में कुछ विशेष यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का कानूनी ढांचा तैयार किया जा रहा है। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद ही यूपीआई पर शुल्क को लेकर राजनीतिक बहस और जन-चर्चाएं शुरू हो गईं।

विपक्ष का आरोप और वित्त मंत्री की सफाई

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दावा किया कि यह संशोधन उस कानूनी सुरक्षा को खत्म कर देगा जिसने अब तक यूपीआई ट्रांजेक्शन को पूरी तरह मुफ्त रखा है। उनका आरोप है कि इससे भविष्य में एमडीआर लगाने का रास्ता साफ होगा और इसका अंतिम वित्तीय बोझ आम जनता पर पड़ेगा।

विपक्ष के इन दावों को खारिज करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि एमडीआर का नियम केवल मर्चेंट्स (व्यापारियों) पर लागू होता है, अंतिम उपभोक्ता या ग्राहकों पर नहीं। उन्होंने कहा कि इससे प्राप्त होने वाले राजस्व का उपयोग बैंक और फिनटेक कंपनियां अपने इंफ्रास्ट्रक्चर, इनोवेशन और साइबर सुरक्षा को मजबूत करने में करेंगी, जिसका प्रत्यक्ष लाभ अंततः सभी यूपीआई यूजर्स को ही मिलेगा।

क्या अभी लागू हो गया है एमडीआर और आखिर क्या है यह शुल्क?

वित्त मंत्री के अनुसार, अभी इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। बिल संसद से पास होने के बाद नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की 'यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी' इस पर अंतिम निर्णय लेगी। फिलहाल यह केवल एक प्रस्ताव के स्तर पर है।

एमडीआर (Merchant Discount Rate) वह फीस होती है जो कोई व्यापारी या दुकानदार डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है। यह शुल्क ग्राहक की जेब से नहीं काटा जाता, बल्कि दुकानदारों द्वारा डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले चुकाया जाता है। वर्तमान नियमों के अनुसार यूपीआई और रूपे डेबिट कार्ड पर एमडीआर 0% है।

जानिए किन ट्रांजेक्शन और किन दुकानों पर लग सकता है चार्ज

प्रस्तावित योजना के अनुसार, ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई लेन-देन पर 0.3% से 0.5% तक का एमडीआर लगाया जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नियम केवल ₹1.5 करोड़ से ज्यादा के सालाना टर्नओवर वाले बड़े मर्चेंट्स पर ही लागू करने की योजना है। छोटे व्यापारी, सब्जी वाले और किराना दुकानदार इस दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे।

आरबीआई गवर्नर का रुख और पेमेंट सेटलमेंट एक्ट का गणित

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मॉनेटरी पॉलिसी के बाद कहा कि अभी से किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि सरकार कानून में संशोधन कर रही है और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को चलाने का खर्च किसी न किसी को उठाना होगा। आरबीआई की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल पेमेंट सुरक्षित, टिकाऊ और सभी के लिए किफायती बना रहे।

डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में धारा 10A जोड़ी थी, जिसने यूपीआई और रूपे कार्ड पर एमडीआर लगाने पर रोक लगा दी थी। अब धारा 10A में संशोधन के जरिए सरकार और एनपीसीआई को यह अधिकार मिल जाएगा कि वे जरूरत पड़ने पर केवल बड़े व्यावसायिक लेन-देन पर सीमित शुल्क (MDR) तय कर सकें, ताकि इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा का खर्च निकाला जा सके।

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