सारांश
केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा प्रस्तावित 10 और 20 रुपये के पॉलीमर (प्लास्टिक) बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत दोनों मूल्यों के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोट जारी किए जाएंगे। मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी साझा की है। नए पॉलीमर नोट वर्तमान में जारी कागजी नोटों के साथ ही चलन में बने रहेंगे।
राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बड़ा बयान
मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि सरकार ने 10 और 20 रुपये के पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के इस प्रस्ताव के तहत 10 और 20 रुपये मूल्यवर्ग के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोट बाजार में उतारे जाएंगे। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि ये नए पॉलीमर नोट वर्तमान में जारी कागजी नोटों के साथ ही चलन में बने रहेंगे और ट्रायल सफल रहने पर इन्हें नियमित रूप से जारी किया जाएगा।
पॉलीमर नोटों की खासियत और इन्हें जारी करने की मुख्य वजहें
पॉलीमर बैंकनोट साधारण कागज के स्थान पर एक विशेष प्रकार के प्लास्टिक मटेरियल (पॉलीमर सबस्ट्रेट) पर मुद्रित किए जाते हैं। ये छूने में कागजी नोटों की तरह ही हल्के होते हैं, परंतु पानी में गलते नहीं हैं और बेहद टिकाऊ होते हैं। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में पॉलीमर नोट 30 वर्षों से भी अधिक समय से सफलतापूर्वक उपयोग किए जा रहे हैं।
इन्हें लाने के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:
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लंबी उम्र व टिकाऊपन: ये नोट पानी, धूल तथा गंदगी से खराब नहीं होते और आसानी से फटते भी नहीं हैं।
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सुरक्षा फीचर्स और नकली नोटों पर रोक: पॉलीमर शीट पर आधुनिक और उन्नत सुरक्षा फीचर्स जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोट बनाना लगभग असंभव हो जाएगा।
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छपाई खर्च में बड़ी बचत: कागजी नोट जल्दी खराब होते हैं, जिससे उनके पुनः मुद्रण पर भारी खर्च आता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में आरबीआई ने कागजी नोटों की छपाई पर ₹6,372.8 करोड़ खर्च किए थे। पॉलीमर नोटों की लंबी आयु से बार-बार छपाई का यह खर्च काफी हद तक कम हो जाएगा।
कागजी नोटों के भविष्य और चलन व्यवस्था पर स्थिति साफ
सरकार और रिजर्व बैंक ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि पॉलीमर नोटों के आने से मौजूदा कागजी नोट बंद या चलन से बाहर नहीं होंगे। दोनों तरह के नोट बाजार में एक साथ (को-एग्जिस्टेंस) चलते रहेंगे। यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से (फेज मैनर में) किया जाएगा और जब तक नए नोट पूरी तरह व्यवस्था में स्थापित नहीं हो जाते, तब तक कागजी नोटों का सर्कुलेशन निरंतर जारी रहेगा।
भारत में पॉलीमर नोटों की पृष्ठभूमि और वैश्विक स्थिति
भारत में नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के उद्देश्य से पहली बार 2012 में पॉलीमर नोट लाने का प्रयास किया गया था, हालांकि तकनीकी कारणों से वह प्रोजेक्ट रुक गया था। मई-जून में मीडिया और आरबीआई रिपोर्टों में इस पर पुनः विचार की बात आई, जिसके बाद जून में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इसके मूल्यांकन की पुष्टि की थी। वर्तमान में दुनिया के 60 से अधिक देशों में पॉलीमर बैंकनोट्स का उपयोग हो रहा है, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (यूके) और न्यूजीलैंड जैसे प्रमुख देश शामिल हैं।
देश में अब तक की नोटबंदी और नोट बदलने का इतिहास
भारत के इतिहास में अब तक बड़े मूल्य के नोटों को बंद करने या बदलने के 3 प्रमुख फैसले लिए गए हैं:
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जनवरी 1946 (ब्रिटिश काल): तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने काले धन पर लगाम लगाने के लिए ₹500, ₹1000 और ₹10,000 के नोट बंद किए थे। बाद में 1954 में ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के नोट फिर शुरू किए गए।
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जनवरी 1978 (मोरारजी देसाई सरकार): जनता पार्टी सरकार ने भ्रष्टाचार और चुनावों में अवैध धन के इस्तेमाल को रोकने के लिए ₹1,000, ₹5,000 और ₹10,000 के नोट अमान्य किए।
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8 नवंबर 2016 (नरेंद्र मोदी सरकार): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ₹500 और ₹1,000 के नोटों को अमान्य घोषित कर दिया था, जिनकी जगह ₹500 का नया नोट और ₹2,000 का नोट जारी किया गया। बाद में 19 मई 2023 को आरबीआई ने 'क्लीन नोट पॉलिसी' के तहत ₹2,000 के नोट को भी सर्कुलेशन से वापस ले लिया था।