सारांश
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ पिछले 18 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (15 जुलाई 2026) को अर्जेंट सुनवाई की। कोर्ट ने मामले को बेहद जरूरी मानते हुए केंद्र और दिल्ली सरकार से गुरुवार सुबह तक जवाब तलब किया है। अनशन के कारण वांगचुक का वजन करीब 8.5 किलोग्राम तक गिर गया है, जिससे उनकी जान को खतरा बना हुआ है।
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जेंट सुनवाई
राजधानी नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर बीते 28 जून से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर त्वरित सुनवाई करते हुए सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को अत्यंत गंभीर और जरूरी माना है। अदालत ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है और दोनों ही सरकारों से गुरुवार सुबह तक इस पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में मांग की गई है कि वांगचुक की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत उचित मेडिकल सुविधा और इलाज मुहैया कराया जाए।
तेजी से गिर रहा है वजन, मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति
कथित तौर पर नीट (NEET) पेपर लीक और परीक्षाओं में हुई अन्य गड़बड़ियों के खिलाफ पिछले 18 दिनों से प्रदर्शन कर रहे सोनम वांगचुक की शारीरिक स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। प्राप्त विवरण के अनुसार, भूख हड़ताल के कारण उनका वजन लगभग 8.25 से 8.5 किलोग्राम तक घट गया है। मंगलवार को उनका ब्लड प्रेशर 109/70 mm Hg रिकॉर्ड किया गया था। डॉक्टरों और याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उन्हें लो ब्लड शुगर, चक्कर आने, अत्यधिक कमजोरी और मांसपेशियां शिथिल होने जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि सरकार वांगचुक को तुरंत इमरजेंसी ट्रीटमेंट, जीवनरक्षक उपचार और जरूरी पोषण उपलब्ध कराए, साथ ही उनके द्वारा उठाए गए आंदोलन के मुद्दों पर बातचीत की प्रक्रिया शुरू की जाए। याचिका में तर्क दिया गया है कि शांतिपूर्ण विरोध नागरिक का अधिकार है, लेकिन किसी की जान खतरे में होने पर सरकार मूकदर्शक नहीं रह सकती और नागरिक की जान बचाना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन और शशि थरूर की अपील
इस आंदोलन के संदर्भ में यह भी सामने आया है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नामक संगठन नीट पेपर लीक के विरोध में आगामी 20 जून से ही जंतर-मंतर पर लगातार प्रदर्शन कर रहा है। यह पार्टी कथित तौर पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत द्वारा बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से किए जाने के बाद अस्तित्व में आई थी। वर्तमान में सीजेपी के कार्यकर्ता शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और सोनम वांगचुक भी इसी आंदोलन के साथ जुड़े हुए हैं।
इस बीच, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया के माध्यम से सोनम वांगचुक से अनशन खत्म करने की एक भावुक अपील की है। थरूर ने अपने संदेश में लिखा कि वांगचुक ने देश की अंतरात्मा को झकझोरने का अपना उद्देश्य पूरा कर लिया है, और देश को आगे की लंबी लड़ाई के लिए उनकी आवाज की जरूरत है। उन्होंने याद दिलाया कि सोमवार से संसद का सत्र शुरू हो रहा है, जहां लोकतंत्र के सबसे बड़े मंच पर छात्रों से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को पूरी ताकत से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का वास्तविक समाधान संसद में खोजा जाना चाहिए, न कि किसी की जान को जोखिम में डालकर।
वांगचुक का पिछला रिकॉर्ड और ऐतिहासिक भूख हड़तालों का संदर्भ
सोनम वांगचुक का विवादों और आंदोलनों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले, लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर किए गए आंदोलन के दौरान वे 170 दिनों तक जोधपुर जेल में बंद रहे थे। उनके उस अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी और 90 अन्य घायल हुए थे। तत्कालीन सरकार ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाते हुए इसके दो दिन बाद, यानी 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया था।
गौरतलब है कि देश में विभिन्न मांगों को लेकर महात्मा गांधी से लेकर जीडी अग्रवाल तक कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भूख हड़ताल का सहारा लिया है। इसी क्रम में मणिपुर से अफस्पा (AFSPA) हटाने की मांग को लेकर इरोम शर्मिला ने करीब 16 साल तक ऐतिहासिक भूख हड़ताल की थी। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, 3 हफ्ते से ज्यादा समय तक भूखा रहने पर शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों (बॉडी पार्ट्स) पर इसका बेहद घातक असर पड़ने लगता है, यही वजह है कि वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर इस समय कानूनी और प्रशासनिक हलकों में चिंता काफी बढ़ गई है।