सारांश
उत्तराखंड की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटीज में से एक वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड टेक्निकल यूनिवर्सिटी (UTU) में दो सेमेस्टर परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आया है। पुलिस जांच में देहरादून के शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता को मुख्य आरोपी पाते हुए गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोप है कि आरोपी ने परीक्षाओं से पहले वॉट्सऐप ग्रुप्स और ऑनलाइन पोर्टल पर प्रश्नपत्र लीक किए थे। इस घटनाक्रम के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने संबंधित दोनों परीक्षाओं को निरस्त कर दिया है, जिससे राज्य के 12 इंजीनियरिंग कॉलेजों के हजारों छात्रों को अब अगस्त के तीसरे हफ्ते में दोबारा परीक्षा देनी होगी।
व्हिसलब्लोअर के ई-मेल और छात्रों की शिकायत से हुआ खुलासा
मामले की शुरुआत 8 जुलाई को हुई जब 'मशीन लर्निंग फॉर इंटरनेट ऑफ थिंग्स' (IOTT004) विषय की परीक्षा संपन्न होने के बाद उसी रात 8:27 बजे यूनिवर्सिटी को एक व्हिसलब्लोअर का ई-मेल मिला। इस ई-मेल में दावा किया गया था कि 3 जुलाई की रात 11:34 बजे वॉट्सऐप ग्रुप पर 'इंपॉर्टेंट क्वेश्चन' के नाम से प्रश्न शेयर किए गए थे, जिनका परीक्षा पत्र से गहरा मेल था। इसके साथ ही वाइस चांसलर डॉ. तृप्ता ठाकुर के अनुसार, 8 जुलाई की परीक्षा के बाद कुछ छात्रों ने भी प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने की शिकायत की थी।
आंतरिक जांच में खुली पोल, एक और पेपर लीक होने की आशंका
यूनिवर्सिटी द्वारा गठित स्वतंत्र जांच समिति और कॉलेज स्तर की आंतरिक जांच रिपोर्ट में आरोप सही पाए गए। जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि 24 जून को आयोजित हुई 'इलेक्ट्रोमैग्नेटिक FIELD थ्योरी' (ECT043) परीक्षा का प्रश्नपत्र भी आरोपी प्रोफेसर डॉ. आशीष कुमार गुप्ता ने ही तैयार किया था। जांच में इस विषय के पेपर की गोपनीयता भी भंग होने की आशंका जताई गई, जिसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दोनों ही परीक्षाओं को रद्द करने का कड़ा फैसला लिया।
आरोपी प्रोफेसर पर FIR, 7 साल का बैन और कॉलेज से बर्खास्तगी
परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की शिकायत पर प्रेमनगर थाने में आरोपी प्रोफेसर के खिलाफ BNS, 2023 की धारा 316 (अमानत में खयानत), धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया। यूनिवर्सिटी ने कार्रवाई करते हुए डॉ. आशीष कुमार गुप्ता को आगामी 7 वर्षों के लिए परीक्षा संबंधी सभी गतिविधियों से प्रतिबंधित कर दिया है। उधर, शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के निदेशक प्रो. टीएस सिद्धू के अनुसार, आंतरिक जांच में दोष सिद्ध होने पर आरोपी प्रोफेसर की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं। वहीं, परीक्षा की गोपनीयता में लापरवाही के लिए शिवालिक कॉलेज को भी सख्त चेतावनी दी गई है।
12 इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों पर असर, अगस्त में दोबारा होंगी परीक्षाएं
परीक्षा निरस्त होने से राज्य के 12 प्रमुख इंजीनियरिंग कॉलेजों के हजारों छात्र प्रभावित हुए हैं। इनमें बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड साइंसेज (भीमताल), तुलाज इंस्टीट्यूट (देहरादून), बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं प्रौद्योगिकी संस्थान (द्वाराहाट), रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (रुड़की), शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (देहरादून), जयरामभाई पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (देहरादून), माया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (देहरादून), बाबा फरीद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (देहरादून), टीएचडीसी इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (टिहरी), नन्हीं परी सीमांत इंजीनियरिंग संस्थान (पिथौरागढ़), वूमेन्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (देहरादून) और इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (गोपेश्वर) शामिल हैं। परीक्षा नियंत्रक के अनुसार, अब ये रद्द परीक्षाएं अगस्त के तीसरे हफ्ते में दोबारा आयोजित की जाएंगी।
सरकार का कड़ा रुख और छात्रों का उग्र प्रदर्शन
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं, जबकि राज्य के शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई का आश्वासन दिया है। उल्लेखनीय है कि पेपर लीक की आधिकारिक पुष्टि से दो दिन पहले (मंगलवार को) उत्तराखंड बेरोजगार संघ के बैनर तले छात्रों ने देहरादून में जोरदार प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से तीखी झड़प हुई थी और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा था।