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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट : मुख्यतः पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा को आरोपी बनाने की तैयारी

सारांश 

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ गई है। कथित तौर पर नौ पेज की इस जांच रिपोर्ट में केवल एक पदाधिकारी, पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के नाम और उनकी लापरवाही का स्पष्ट जिक्र है, जबकि चर्चाओं में रहे महासचिव चंपत राय और गोपाल राव का नाम इसमें शामिल भी नहीं है। सूत्रों के अनुसार, घटना की जानकारी होने के बावजूद ठोस कदम न उठाने के कारण अनिल मिश्रा को साजिश का आरोपी बनाने की तैयारी की जा रही है, वहीं अन्य पदाधिकारियों के नाम भी स्पष्ट नहीं लिखे गए हैं। इस मामले में बैंक कर्मियों की मिलीभगत के भी सबूत मिले हैं।


नौ पेज की एसआईटी रिपोर्ट में केवल एक पदाधिकारी का जिक्र

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की एसआईटी जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि नौ पेज की इस विस्तृत रिपोर्ट में सभी आरोपियों की अलग-अलग भूमिका तय की गई है, लेकिन ट्रस्ट के पदाधिकारियों में केवल पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का नाम ही स्पष्ट रूप से लिखा गया है। रिपोर्ट में महासचिव चंपत राय और गोपाल राव का सीधे तौर पर कहीं भी जिक्र नहीं है। ऐसे में यह चर्चाएं तेज हो गई हैं कि क्या चंपत राय को बचाने के लिए बनाया जा रहा प्रशासनिक दबाव काम आ गया है। हालांकि, रिपोर्ट के सातवें पेज पर यह भी उल्लेख है कि चोरी के दौरान गणनाकर्मी तय ड्रेस में नहीं थे, जिससे रकम पार करना आसान हुआ और इसके लिए ट्रस्ट के सभी कर्मी व पदाधिकारी जिम्मेदार हैं।

पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को साजिश का आरोपी बनाने की तैयारी

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस अब एसआईटी की रिपोर्ट को आधार बनाकर डॉ. अनिल मिश्रा को मामले में आरोपी बनाने की तैयारी कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, अनिल मिश्रा की इस पूरे मामले में सीधी जिम्मेदारी थी क्योंकि उन्होंने सुरक्षा उपायों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित नहीं किया। उन पर आरोप है कि उन्हें पूरा खेल होने की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जानकारी के बावजूद चोरी की अनुमति देने के कारण उन्हें साजिश का आरोपी बनाया जा सकता है। इसके अलावा, विवेचना के दौरान पुलिस को कुछ बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के भी पुख्ता सबूत मिले हैं, जिसके चलते तीन से चार बैंक कर्मियों पर भी कार्रवाई होना तय माना जा रहा है।

चंपत राय ने तोड़ी चुप्पी, एसबीआई और अनिल मिश्रा पर मढ़ा दोष

इस पूरे विवाद पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपनी लंबी चुप्पी तोड़ी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एसआईटी को भेजे गए एक पत्र के अनुसार, चंपत राय ने चढ़ावा चोरी के लिए सीधे तौर पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और डॉ. अनिल मिश्रा को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने 6 फरवरी 2025 को जारी गणना प्रक्रिया के दिशानिर्देशों पर असहमति जताई, जिस पर डॉ. अनिल मिश्रा और एसबीआई अयोध्या शाखा के मुख्य प्रबंधक के हस्ताक्षर हैं। चंपत राय का दावा है कि अगस्त 2020 से जून 2026 तक के सभी महत्वपूर्ण अनुबंधों पर उनके हस्ताक्षर थे, लेकिन इस जरूरी दस्तावेज पर उनसे हस्ताक्षर नहीं कराए गए, जो कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने 9 फरवरी 2024 के एमओयू का हवाला देते हुए एसबीआई की सुरक्षा व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि, इस वायरल पत्र पर ट्रस्ट या एसआईटी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

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