सारांश
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, को चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि यह मामला प्रथम दृष्टया दंड कानून के तहत अपराध का प्रतीत होता है और इसकी जांच पूरी ईमानदारी व स्वतंत्रता से होनी चाहिए। इसके लिए एक नई एसआईटी (SIT) बनाई जाए, जिसकी अगुआई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करें। शीर्ष अदालत के इस रुख के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत नई SIT के गठन को मंजूरी दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और राजनीति न करने की सख्त सलाह
20 जुलाई 2026, सोमवार को दोपहर 3:30 बजे हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि यह मामला प्रथम दृष्टया दंड कानून के तहत अपराध का प्रतीत होता है और इसकी जांच पूरी ईमानदारी व स्वतंत्रता से होनी चाहिए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि जांच को उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए और इस मुद्दे पर राजनीति न की जाए। सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता को उत्तर प्रदेश सरकार से नए नाम लेकर आने को कहा गया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 27 जुलाई 2026 को होगी।
सीएम योगी की मंजूरी और SIT में बड़े बदलाव
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नई जांच टीम के गठन की स्वीकृति दे दी है। सूत्रों के अनुसार, पहले बनी SIT से लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत और विशेष सचिव नीलरतन कुमार को बाहर रखा जाएगा। उनके स्थान पर अब एक डीआईजी (DIG) और एक एसएसपी (SSP) स्तर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को टीम में शामिल किया जाएगा। हालांकि, पुरानी SIT द्वारा तैयार रिपोर्ट के भविष्य पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
मुख्य कानूनी बहस और याचिकाकर्ताओं के तर्क
अदालत की कार्यवाही के दौरान याचिकाकर्ताओं के वकील देवदत्त कामत ने मांग रखी कि मंदिर में आए दान का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए। वहीं, याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि वर्तमान जांच दल के पास वित्तीय मामलों की गहराई से जांच के लिए आवश्यक फोरेंसिक विशेषज्ञ और संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। बिना एफआईआर के शुरुआती जांच पर भी सवाल उठाए गए। याचिकाकर्ताओं ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के मामले का उदाहरण देते हुए केंद्रीय एजेंसियों या विशेष नेतृत्व में स्वतंत्र जांच की मांग की थी।
8 आरोपी जेल में बंद और अब तक की पूरी कार्रवाई
इस मामले में मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी कृष्ण मोहन द्वारा 25 जून को दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा को गिरफ्तार किया था। ये सभी 8 आरोपी फिलहाल फैजाबाद जेल में बंद हैं, जिन पर चढ़ावे की गिनती के दौरान नोटों और गहनों की चोरी का आरोप है। इसके अलावा, SIT ने ट्रस्टी अनिल मिश्रा को गिनती की प्रक्रिया में लापरवाही बरतने और गाइडलाइंस का पालन न करने का जिम्मेदार माना था। इस प्रकरण के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया है।