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उत्तर प्रदेश में बसपा प्रमुख मायावती ने दलितों को गुमराह कर सड़कों पर उतारने और 'मगरमच्छ के आंसू' बहाने का आरोप लगाते हुए विपक्षी संगठनों पर निशाना साधा, जिस पर नगीना सांसद चंद्रशेखर ने मेरठ में तीखा पलटवार किया है। वहीं, अयोध्या में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा व कांग्रेस पर हमला बोलते हुए हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाने का गंभीर आरोप लगाया, उन्होंने नगर पंचायत खिरौनी (सुचित्तागंज) का नाम मां ज्वाला जी के नाम पर और भदरसा का नाम 'भरत नगर' करने का ऐलान किया। दूसरी तरफ, दावा है कि राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती करने वाले 20 कर्मचारियों ने जांच के बाद बढ़े कार्यभार और सुरक्षा नियमों के चलते अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
1. बसपा प्रमुख मायावती और सांसद चंद्रशेखर के बीच तीखी बयानबाजी; सड़कों पर उतरने को लेकर आमने-सामने हुए नेता
मायावती का विपक्ष पर तीखा हमला
शुक्रवार को लखनऊ में मीडिया से बातचीत करते हुए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने बिना नाम लिए नगीना सांसद चंद्रशेखर आज़ाद और उनके संगठन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ संगठन और राजनीतिक दल अपने संकीर्ण स्वार्थ के लिए दलितों और वंचितों को गुमराह कर सड़कों पर उतार रहे हैं। ये लोग हिंसा, हंगामा और सड़क जाम जैसी परिस्थितियां पैदा करते हैं और फिर घटनास्थल पर पहुंचकर 'मगरमच्छ के आंसू' बहाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा व स्थानीय चुनावों के मद्देनजर जनता को सतर्क रहने की सलाह दी।
चंद्रशेखर का पलटवार
मायावती के इस बयान पर पलटवार करते हुए सांसद चंद्रशेखर ने शुक्रवार दोपहर करीब 4 बजे मेरठ में कहा कि यदि हम मगरमच्छ के आंसू बहाने आते हैं, तो आपको किसने रोका है, आप भी आकर आंसू बहाइए। उन्होंने कहा कि इंसाफ के लिए कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जाने में 10 साल लग जाएंगे, तब तक क्या बहन-बेटियों की इज्जत लुटने पर हम चुप बैठे रहें?
मेरठ और सहारनपुर की घटनाओं का जिक्र
बसपा प्रमुख का इशारा मुख्य रूप से मेरठ के ललिता गौतम हत्याकांड और सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र के लालवाला गांव में हुए जातीय संघर्ष की ओर था। मेरठ में छात्रा का शव 17 मई को मिलने के बाद 8 जुलाई को भीम आर्मी से जुड़े लोगों ने प्रदर्शन किया था, जिसमें कथित तौर पर पथराव और सड़क जाम के कारण 11 लोग घायल हुए थे और पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था। मायावती ने कहा कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के अनुसार न्याय की लड़ाई संवैधानिक दायरे में रहकर लड़ी जानी चाहिए और सत्ता की 'मास्टर चाबी' हासिल करना ही सब दुखों की दवा है।
2. अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ; सपा और कांग्रेस पर हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाने का लगाया आरोप
विपक्ष पर तुष्टिकरण के आरोप
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अयोध्या में एक जनसभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। सुबह 11:30 बजे अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि जो लोग आज आस्था की बात करते हैं, उन्होंने कभी पवित्र हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाने का पाप किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ करवा पाएगा? सीएम ने दावा किया कि इन दलों ने राम मंदिर निर्माण में हमेशा बाधाएं खड़ी कीं और रामभक्तों पर लाठियां व गोलियां चलवाईं।
विकास परियोजनाओं का उपहार
20 दिन में दूसरी बार अयोध्या पहुंचे मुख्यमंत्री ने बीकापुर में 432 करोड़ रुपये की 217 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। उन्होंने नगर पंचायत खिरौनी (सुचित्तागंज) का नाम मां ज्वाला जी के नाम पर और भदरसा का नाम 'भरत नगर' करने का ऐलान किया। इसके बाद वे बस्ती पहुंचे, जहां उन्होंने 504 करोड़ रुपये से अधिक की 77 विकास परियोजनाओं की सौगात दी।
हनुमानगढ़ी का पुराना वाकया
सपा-कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों की पृष्ठभूमि 2000 के दशक की शुरुआत से जुड़ी है। साल 2003 में अयोध्या विवाद को कोर्ट के बाहर सुलझाने के प्रयासों के तहत हनुमानगढ़ी के तत्कालीन महंत ज्ञान दास के आश्रम में एक रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया था, जिसमें हाशिम अंसारी और सादिक अली शामिल हुए थे। उस दौरान वहां नमाज पढ़े जाने के आरोपों के बाद यह मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था और परिसर में रोजा इफ्तार पर स्टे लग गया था।
3. राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती करने वाले 20 कर्मचारियों का इस्तीफा; जांच के बीच बढ़ा कार्यभार और सुरक्षा का दबाव
भारी संख्या में इस्तीफे
अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती करने वाले 20 कर्मचारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, चढ़ावे में कथित गबन का मामला सामने आने और जांच शुरू होने के बाद से ही कार्यप्रणाली में बदलाव किया गया था, जिससे कर्मचारियों पर काम का दबाव अत्यधिक बढ़ गया था।
कार्यप्रणाली और नियमों में बदलाव
इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों का कहना है कि पहले चढ़ावे की गिनती दो शिफ्टों में टेबल-कुर्सी पर बैठकर की जाती थी। अब यह प्रक्रिया केवल एक ही शिफ्ट में करीब 9 से 10 घंटे तक लगातार चलती है और उन्हें फर्श पर बैठकर काम करना पड़ता है, जिसके बदले मानदेय में भी कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। इसके अलावा गिनती केंद्र की सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त कर दी गई है। कर्मचारियों को बिना जूते-चप्पल, मोबाइल फोन और निजी सामान के कई चरणों की तलाशी के बाद ही अंदर जाने की अनुमति मिलती है।
डिजिटल व्यवस्था की तैयारी
पहले इस कार्य में करीब 40 कर्मचारी तैनात थे, लेकिन अब इस्तीफों के बाद केवल एक दर्जन के करीब नियमित कर्मचारी ही काम संभाल रहे हैं। इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए चार अलग कर्मचारियों की तैनाती की गई है। वहीं, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अब आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए यूनिफॉर्म, क्यूआर कोड आधारित पहचान पत्र और डिजिटल एंट्री-एग्जिट सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रहा है। कथित गबन के इस मामले में पुलिस अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।