सारांश
संसद की एक स्थायी समिति ने खाद्य नियामक FSSAI को पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड के लिए 'फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग' (FOPNL) नियमों को तय समय सीमा में लागू करने का निर्देश दिया है। समिति ने मसौदा जारी होने के दो साल से अधिक समय बाद भी इसे अधिसूचित न किए जाने पर चिंता जताई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अब बिकने वाले उत्पादों पर चीनी के स्तर के आधार पर लाल, पीले और हरे रंग के लेबल लगाए जाएंगे, जिससे आम उपभोक्ता आसानी से सेहतमंद विकल्प चुन सकेंगे।
ड्राफ्ट नियमों के दो साल बाद भी देरी पर संसदीय समिति की चिंता
संसदीय समिति ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट 'रेगुलेशन ऑफ पैकेज्ड कॉमोडिटीज विद स्पेसिफिक रेफरेंस टू शुगर कॉन्टेंट इन बेसी प्रोडक्ट एंड अदर फूड प्रोडक्ट्स' में FSSAI की धीमी प्रक्रिया पर असंतोष जताया है। रिपोर्ट के अनुसार, FSSAI ने 13 सितंबर 2022 को ही फ्रंट-ऑफ-पैक लेबलिंग के ड्राफ्ट नियमों को अधिसूचित कर दिया था। इसके बाद नियामक को विभिन्न अंशधारकों और उद्योग जगत से 14,000 से अधिक आपत्तियां व सुझाव प्राप्त हुए, जिनकी अभी भी केवल समीक्षा की जा रही है। समिति ने कहा कि इस दो साल से अधिक की देरी के कारण उपभोक्ताओं, विशेषकर बच्चों के खाद्य पदार्थों में चीनी की सही और सरल जानकारी नहीं मिल पा रही है।
मौजूदा जटिल लेबलों को समझने में आम उपभोक्ताओं को परेशानी
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में पैक्ड फूड उत्पादों पर दी जाने वाली पोषण संबंधी जानकारी मुख्य रूप से जटिल गणितीय आंकड़ों पर आधारित होती है। पैकेट के पीछे बारीक अक्षरों में पोषक तत्वों की मात्रा ग्राम या 'दैनिक अनुशंसित खुराक' (RDA) के प्रतिशत के रूप में दर्ज होती है। ऐसे में आम खरीदारी के दौरान उपभोक्ता इन आंकड़ों को देखकर तुरंत स्वास्थ्यवर्धक निर्णय नहीं ले पाते हैं। पैकेज के सामने स्पष्ट चेतावनी या रंग-आधारित संकेत न होने से उपभोक्ताओं के व्यवहार में सही बदलाव लाना कठिन साबित हो रहा है।
तीन रंगों और चेतावनी वाले लेबल का मिला सुझाव
उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए संसदीय समिति ने एक नजर में समझ आने वाली तीन-रंगों वाली 'कलर-कोडेड' प्रणाली की सिफारिश की है:
- लाल रंग: उच्च चीनी स्तर वाले उत्पादों के लिए।
- पीला रंग: मध्यम चीनी स्तर वाले उत्पादों के लिए।
- हरा रंग: कम चीनी स्तर वाले स्वस्थ उत्पादों के लिए।
इसके साथ ही समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि जिन पैक्ड फूड्स में चीनी की मात्रा अत्यधिक पाई जाए, उन पर सामने की तरफ स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाले चेतावनी लेबल भी छापे जाने चाहिए।
स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए जल्द कदम उठाने की आवश्यकता
बढ़ते प्रोसेस्ड फूड के दौर में उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए खाद्य पदार्थों की सामग्री में पूरी पारदर्शिता आवश्यक मानी जा रही है। संसदीय समिति के इन निर्देशों के बाद अब FSSAI को प्राप्त 14,000 से अधिक सुझावों की समीक्षा जल्द पूरी कर इस समयबद्ध योजना को अधिसूचित करना होगा, ताकि देश में एक पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल लेबलिंग प्रणाली लागू की जा सके।