सारांश
उखरुल जिले में सोमवार दोपहर को संदिग्ध उग्रवादियों ने 40 असम राइफल्स के काफिले पर घात लगाकर हमला कर दिया। मणिपुर पुलिस के अनुसार, अत्याधुनिक हथियारों से की गई अंधाधुंध गोलीबारी और आईईडी (IED) विस्फोटों के कारण इस हमले में उत्तराखंड के अल्मोड़ा के वारंट ऑफिसर बलवंत सिंह और पौड़ी गढ़वाल के राइफलमैन चंद्र मोहन सिंह शहीद हो गए। शहीदों के पार्थिव शरीर बुधवार शाम तक उनके पैतृक गांवों में पहुंचने की संभावना है, जहां गुरुवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
शांगशाक बटालियन मुख्यालय लौट रहे काफिले पर घात लगाकर हमला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा मणिपुर के उखरुल जिले में नुंगशांग कोंग के पास सोमवार दोपहर को उस समय हुआ, जब असम राइफल्स के जवान अपनी ड्यूटी पूरी कर शांगशाक बटालियन मुख्यालय लौट रहे थे। इसी दौरान संदिग्ध उग्रवादियों ने घात लगाकर उनके काफिले को निशाना बनाया। हमलावरों ने जवानों पर अत्याधुनिक हथियारों से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी और साथ ही आईईडी (IED) विस्फोट भी किए। इस अचानक हुए हमले में उत्तराखंड निवासी बलवंत सिंह और चंद्र मोहन सिंह को गोली लगते ही उनकी मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद उन्हें शांगशाक स्थित असम राइफल्स के नजदीकी कैंप ले जाया गया।
कई घंटों तक चली गोलीबारी, इलाके में तलाशी अभियान जारी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, उग्रवादियों द्वारा यह हमला सोमवार दोपहर करीब 1:50 बजे किया गया था, जिसके बाद सुरक्षा बलों और हमलावरों के बीच शाम करीब 4:10 बजे तक लगातार गोलीबारी चलती रही। इलाके में कई घंटों तक गोलियों की आवाजें सुनाई देती रहीं। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी और उग्रवादियों की धरपकड़ के लिए एक सघन तलाशी अभियान शुरू किया। हालांकि, अभी तक किसी भी हमलावर की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
शहीदों की पहचान और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की तैयारी
हमले में शहीद हुए दोनों वीर जवानों की पहचान उत्तराखंड के मूल निवासियों के रूप में हुई है। इनमें पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले हवलदार (जीडी) चंद्रमोहन सिंह और अल्मोड़ा के रहने वाले वारंट ऑफिसर (जीडी) बलवंत सिंह शामिल हैं। दोनों शहीदों के पार्थिव शरीरों का उखरुल में पोस्टमॉर्टम कराए जाने के बाद उन्हें शांगशाक स्थित असम राइफल्स कैंप में रखा गया था। प्रशासन के अनुसार, बुधवार को उनके पार्थिव शरीर उत्तराखंड स्थित उनके पैतृक घरों के लिए रवाना कर दिए गए हैं। संभावना जताई जा रही है कि बुधवार शाम तक पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांवों में पहुंच जाएंगे और गुरुवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ दोनों शहीदों का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मणिपुर के गृह मंत्री ने की निंदा, दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन
मणिपुर के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजाम ने असम राइफल्स के काफिले पर हुए इस कायराना हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि ऐसी हिंसक घटनाएं राज्य में शांति और सौहार्द स्थापित करने के प्रयासों को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं। गृह मंत्री ने शहीद जवानों के शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की और आश्वासन दिया कि इस कायरतापूर्ण कृत्य के दोषियों को जल्द ही कानून के दायरे में लाकर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कांगपोकपी जिले में भी उग्रवादी हिंसा, चर्च में जुटे लोग बने निशाना
मणिपुर में हिंसा की एक अन्य घटना कांगपोकपी जिले से भी सामने आई है, जहां थिंगखोंगजांग कुकी गांव में हुई गोलीबारी में एक महिला और एक बच्चा घायल हो गए हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, रविवार को जब ग्रामीण प्रार्थना के लिए चर्च में इकट्ठा हुए थे, तभी उग्रवादियों ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। हमलावरों पर चर्च के पास मौजूद लोगों पर अंधाधुंध गोलीबारी करने, बम और विस्फोटक फेंकने के साथ-साथ कुछ घरों में आग लगाने का भी आरोप है, जिससे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।