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यूपी में जमीनों के मुकदमों में जल्द मिलेगी वर्चुअल सुनवाई की सुविधा : राजस्व परिषद ने शासन को भेजा प्रस्ताव

सारांश 
प्रदेश में जमीनों से जुड़े मुकदमों के त्वरित निस्तारण के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 'ई-पेशी' (वर्चुअल सुनवाई) की सुविधा देने की तैयारी चल रही है। 12 जुलाई 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, राजस्व परिषद ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में ले जाए जाने की उम्मीद है। इसके साथ ही कृषि भूमि के स्वतः (ऑटो) नामांतरण की व्यवस्था भी लागू करने का प्रस्ताव है, जिससे वादकारियों के समय और धन की बचत होगी।


अदालतों के चक्करों से मिलेगी मुक्ति, बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को बड़ी राहत

दावे के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में राजस्व वादों से जुड़े पक्षकारों को अब अदालतों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने की अनिवार्य बाध्यता से बड़ी राहत मिल सकती है। वर्तमान व्यवस्था के तहत पक्षकारों को संबंधित कोर्ट में खुद उपस्थित होना पड़ता है, जिसके कारण मुकदमों के निपटारे में देरी होती है और वादकारियों के धन व समय की भी काफी बर्बादी होती है। सूत्रों के अनुसार, सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और गंभीर रूप से बीमार लोगों को होती है, क्योंकि उनके लिए हर तारीख पर कोर्ट पहुंचना बेहद मुश्किल होता है। इस अनुपस्थिति के चलते अक्सर सुनवाई की नई तारीख देनी पड़ जाती है। इसी स्थिति को देखते हुए तहसीलदार, उपजिलाधिकारी (एसडीएम), जिलाधिकारी (डीएम), मंडलायुक्त और राजस्व परिषद के न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअल सुनवाई यानी ई-पेशी की व्यवस्था लागू करने का फैसला किया गया है।

हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की तर्ज पर तैयार हुआ वर्चुअल सुनवाई का ड्राफ्ट

कथित तौर पर, देश की शीर्ष अदालतों यानी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही वर्चुअल सुनवाई की सफल व्यवस्था संचालित की जा रही है। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने भी जमीनी मुकदमों के लिए अपना एक विशेष प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। इस प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश सरकार की अंतिम मुहर लगना अभी बाकी है। बताया जा रहा है कि इस ई-पेशी के प्रस्ताव को शीघ्र ही राज्य कैबिनेट की बैठक में मंजूरी के लिए ले जाया जाएगा, जिसके बाद इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी।

कृषि भूमि के स्वतः (ऑटो) दाखिल-खारिज की भी है तैयारी, रजिस्ट्री दफ्तर में ही अपलोड होंगे दस्तावेज

शासन को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार, प्रदेश में कृषि भूमि के स्वतः (ऑटो) नामांतरण या दाखिल-खारिज की एक नई और आधुनिक व्यवस्था भी लागू की जाएगी। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जब कोई व्यक्ति सब रजिस्ट्रार कार्यालय में किसी भूमि की रजिस्ट्री कराने पहुंचेगा, तो सबसे पहले सब रजिस्ट्रार यह जांच करेंगे कि संबंधित भूमि कहीं आरक्षित श्रेणी की सरकारी जमीन तो नहीं है, जिसे खरीदा या बेचा जाना कानूनन प्रतिबंधित हो। इस प्रारंभिक जांच के बाद ही क्रेता और विक्रेता को जमीन की रजिस्ट्री कराने की अनुमति प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही, दाखिल-खारिज के लिए आवश्यक सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज रजिस्ट्री कार्यालय में ही ले लिए जाएंगे और उन्हें ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा, जो संबंधित तहसीलदार को दिखाई देने लगेंगे।

35 दिनों के भीतर ऑनलाइन रिपोर्ट लगाना होगा अनिवार्य, किसानों की सुविधा के लिए जारी रहेगी मैनुअल व्यवस्था

नई व्यवस्था के नियमों के अनुसार, ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड होने के बाद लेखपाल और कानूनगो को 35 दिनों के भीतर पोर्टल पर अपनी आख्या (रिपोर्ट) लगानी होगी। यदि तय समय सीमा के भीतर किसी भी पक्ष की तरफ से कोई आधिकारिक आपत्ति सामने नहीं आती है, तो जमीन का स्वतः (ऑटो) नामांतरण कर दिया जाएगा। हालांकि, शुरुआती चरण में प्रशासन की ओर से पहले से चली आ रही पारंपरिक मैनुअल व्यवस्था को भी पूरी तरह जारी रखा जाएगा, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा या तकनीकी परेशानी का सामना न करना पड़े। किसानों के पास मैनुअल प्रक्रिया के साथ-साथ ऑटो नामांतरण का आधुनिक विकल्प चुनने की पूरी आजादी होगी।

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