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यूपी के 15 विश्वविद्यालय हॉस्टलों में सप्लाई हो रही ड्रग्स और शराब : CCSU दीक्षांत समारोह में बोलीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल

सारांश 
मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कई विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों में निरक्षण के दौरान बाहर से आने वाले खाने के जरिए ड्रग्स की सप्लाई होने और शराब की बोतलें मिलने का दावा किया, साथ ही बताया कि वे इस संबंध में कुलपतियों को तस्वीरें भी दिखा चुकी हैं। कई विश्वविद्यालयों में सीनियर्स द्वारा नए छात्रों को जबरन नशे का शिकार बनाने के आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार इन 15 में कानपुर, मेरठ, बांदा, गोरखपुर, लखनऊ, अयोध्या, और प्रयागराज के विश्वविद्यालय शामिल हैं। कई शिकायतें छात्रों और प्रोफ़ेसर द्वारा राज्यपाल तक पहुंची हैं।


हॉस्टलों में नशाखोरी पर जताई चिंता, कुलपतियों को दिखाई तस्वीरें

मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSU) के 38वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 199 मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों के माहौल पर गहरी चिंता व्यक्त की। राज्यपाल के अनुसार, उन्होंने लगभग 15 विश्वविद्यालयों के हॉस्टलों का निरीक्षण किया है, जहां बाहर शराब की बोतलें पड़ी मिलीं। सूत्रों के अनुसार इन 15 में कानपुर, मेरठ, बांदा, गोरखपुर, लखनऊ, अयोध्या, और प्रयागराज के विश्वविद्यालय शामिल हैं। कई शिकायतें छात्रों और प्रोफ़ेसर द्वारा राज्यपाल तक पहुंची हैं।

उन्होंने दावा किया कि हॉस्टलों में बाहर से मंगाए जाने वाले खाने के माध्यम से ड्रग्स पहुंच रहा है। राज्यपाल ने बताया कि वे इस स्थिति को लेकर हॉस्टल प्रबंधन और कुलपतियों को बाकायदा तस्वीरें भी दिखा चुकी हैं।

नशा छोड़ने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह प्रतिभा, स्वास्थ्य और परिवार की उम्मीदों को खत्म कर देता है।


बेटियों की सफलता पर दिया जोर और चरित्र निर्माण का संदेश

समारोह में पदक पाने वालों में 75 प्रतिशत बेटियां और 25 प्रतिशत छात्र शामिल रहे। इस उपलब्धि पर राज्यपाल ने कहा कि कई परिवारों में तीन बेटियां होने पर चिंता का माहौल बन जाता है, जबकि बेटियां बेहद होनहार हैं और उन पर भरोसा किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि बेटा हो या बेटी, दोनों के चरित्र निर्माण पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को दिशाहीन होकर किसी के पीछे न चलने और देशहित को ध्यान में रखकर कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने सुझाव भी दिया कि डी.लिट. की उपाधि का दायरा बढ़ाकर उन लोगों को भी सम्मानित किया जाना चाहिए जो औपचारिक रूप से कम पढ़े-लिखे होने के बावजूद कला, कौशल या समाज सेवा में योगदान दे रहे हैं।


रेलवे व्यवस्था, सफाई और अध्यापकों की कार्यशैली पर सवाल

अपनी कार्यशैली का जिक्र करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बताया कि वे वास्तविक स्थिति जानने के लिए ट्रेन से सफर कर रही हैं। उन्होंने कानपुर यात्रा के दौरान रेलवे ट्रैक के किनारे जलभराव और गंदगी की फोटो व वीडियो रेलवे और नगर निगम के अधिकारियों को दिखाकर सफाई करवाई। वहीं, शिक्षा की गुणवत्ता पर बात करते हुए उन्होंने अध्यापकों द्वारा किताबें न लिखने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने एक शिक्षक का उदाहरण देते हुए कहा कि 20 साल के अध्यापन अनुभव में कम से कम पांच पुस्तकें लिखी जानी चाहिए थीं।

नई तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान और युवाओं की भूमिका का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में राज्यपाल ने देश के तकनीकी विकास में युवाओं के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का डिजाइन युवाओं ने ही तैयार किया है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने की आवश्यकता जताई और इसरो (ISRO) के गगनयान मिशन, समुद्र की लहरों व बिजली गिरने से जुड़े शोधों का जिक्र किया। साथ ही, डीआरडीओ (DRDO) द्वारा तैयार किए जा रहे 225 लड़ाकू विमानों का उदाहरण देते हुए युवाओं से वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्रों में बढ़कर योगदान देने का आह्वान किया।

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