संक्षेप
बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और नकदी गायब होने के मामले में बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने उपजिलाधिकारी ज्योतिर्मठ के माध्यम से जांच समिति को सभी वित्तीय रिकॉर्ड सौंप दिए हैं। 14 जुलाई से जारी जांच के बीच अब इन दस्तावेजों का मिलान CCTV फुटेज और बैंक रिकॉर्ड से किया जाएगा। वहीं सुरक्षा व पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में AI क्लाउड सैटेलाइट स्टोरेज सिस्टम लागू करने की तैयारी है, जिससे अधिकृत अधिकारी कहीं से भी लाइव निगरानी कर सकेंगे।
जांच समिति को सौंपे गए वित्तीय अभिलेख
बद्रीनाथ धाम के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और लाखों रुपये की नकदी गायब होने के मामले की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच समिति के निर्देशों पर बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने उपजिलाधिकारी ज्योतिर्मठ के जरिए चढ़ावे से संबंधित सभी वित्तीय रिकॉर्ड गढ़वाल मंडल आयुक्त को उपलब्ध करा दिए हैं। बीकेटीसी के अनुसार, जांच एजेंसियों को पूर्ण सहयोग दिया जा रहा है और सभी मांगे गए दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए गए हैं।
CCTV फुटेज और बैंक रिकॉर्ड से होगा मिलान
जांच एजेंसियां यह स्पष्ट करना चाहती हैं कि मंदिर में प्राप्त दान और नकदी की गिनती, जमा और बैंक ट्रांसफर नियमों के तहत हुए या नहीं। इसके लिए वित्तीय अभिलेखों का मिलान बैंक जमा रिकॉर्ड, चढ़ावा रजिस्टर, कैश बुक और CCTV फुटेज से किया जाएगा। इससे यह साफ हो सकेगा कि कथित चोरी की अवधि के दौरान कितनी राशि मिली, कितनी गिनी गई और कितनी बैंक में जमा की गई। यदि रिकॉर्ड और वास्तविक राशि में अंतर पाया जाता है, तो इन दस्तावेजों को मुख्य साक्ष्य मानकर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
चढ़ावा गणना व्यवस्था की सुरक्षा समीक्षा
जांच समिति केवल कथित चोरी की घटना तक सीमित न रहकर मंदिर परिसर में चढ़ावा गिनने की मौजूदा प्रक्रिया की सुरक्षा और पारदर्शिता की भी जांच कर रही है। इसके तहत चढ़ावा गणना कक्ष की कार्यप्रणाली, कर्मचारियों की जिम्मेदारी, सुरक्षा इंतजाम, CCTV कवरेज और कैश के रखरखाव की समीक्षा की जा रही है।
AI क्लाउड सैटेलाइट स्टोरेज से हाईटेक होगी निगरानी
चढ़ावे से जुड़े मामले के बाद बीकेटीसी ने बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत धामों को AI क्लाउड सैटेलाइट स्टोरेज सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिससे अधिकृत अधिकारी कहीं से भी लाइव निगरानी कर सकेंगे। पूर्व की व्यवस्था में सीमित क्षमता के कारण जांच एजेंसियों को केवल 13 दिन की फुटेज मिल सकी थी, जबकि 45 दिन का दावा किया गया था। नए सिस्टम से 45 दिन तक फुटेज सुरक्षित रखी जा सकेगी। पहले चरण में इसे बद्रीनाथ और केदारनाथ में लागू किया जाएगा, जिसके बाद त्रियुगीनारायण और नृसिंह मंदिर जैसे अन्य मंदिरों में भी इसका विस्तार होगा।
14 जुलाई से जारी जांच के बाद सौंपी जाएगी रिपोर्ट
शासन की तीन सदस्यीय समिति ने 14 जुलाई को बद्रीनाथ धाम पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया था और दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की थी। बीकेटीसी से प्राप्त वित्तीय अभिलेखों के विस्तृत विश्लेषण के बाद जांच समिति अपनी रिपोर्ट गढ़वाल मंडल आयुक्त को सौंपेगी। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता या लापरवाही साबित होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, चढ़ावा गणना कक्ष के आधुनिकीकरण, डिजिटल रिकॉर्डिंग और AI क्लाउड स्टोरेज के जरिए व्यवस्था को पारदर्शी बनाने की सिफारिशें भी की जाएंगी।