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भारत में लॉन्च हुआ हफ्ते में एक बार लगने वाला इंसुलिन इंजेक्शन : रोज-रोज की सुई से मिलेगी राहत, 40% घटेगा खर्च

सारांश 

नई दिल्ली में डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के वयस्क मरीजों के लिए 'Awiqli' (इंसुलिन आइकोडेक) लॉन्च किया है। कंपनी के अनुसार, यह हफ्ते में सिर्फ एक बार लिया जाने वाला बेसल इंसुलिन है, जिससे मरीजों को साल में 365 के बजाय केवल 52 इंजेक्शन लगाने होंगे। नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोत्रिया के मुताबिक, इससे मरीजों के इलाज का बोझ कम होगा। यह मौजूदा दैनिक इंसुलिन से 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ता है, जिसकी 700 यूनिट के पैक की कीमत ₹2611 तय की गई है।


साल में 365 के बजाय सिर्फ 52 इंजेक्शन की जरूरत

भारत के डायबिटीज मरीजों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। डेनमार्क की दिग्गज फार्मा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने बुधवार को भारतीय बाजार में 'Awiqli' (इंसुलिन आइकोडेक) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। कंपनी का दावा है कि यह एक ऐसा बेसल इंसुलिन है, जिसे हफ्ते में केवल एक बार लगाने की आवश्यकता होगी। यह दवा टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्क मरीजों के लिए अत्यधिक उपयोगी बताई जा रही है। इस नई चिकित्सा पद्धति के आने से मरीजों को अब साल के हर दिन (365 दिन) इंजेक्शन लगाने के दर्द से मुक्ति मिलेगी और पूरे साल में सिर्फ 52 बार ही इंसुलिन इंजेक्शन लगाने की जरूरत रह जाएगी।

रोज के डर से इंसुलिन शुरू करने में होने वाली देरी होगी कम

नोवो नॉर्डिस्क के अनुसार, Awiqli का मुख्य उद्देश्य भारत में इंसुलिन थेरेपी शुरू करने में होने वाले समय के अंतराल या देरी को कम करना है। कंपनी का कहना है कि अक्सर मरीजों के बीच रोजाना सुई या इंजेक्शन लगाने का डर होता है, जो इंसुलिन थेरेपी शुरू करने की राह में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरता है। इस डर के कारण मरीज औसतन सात से नौ साल की देरी से अपना उचित इलाज शुरू कर पाते हैं। नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोत्रिया ने जानकारी दी कि इस इंसुलिन को 'FlexTouch' पेन डिवाइस के जरिए बेहद आसानी से सप्ताह में एक बार लगाया जा सकेगा। इससे मरीजों की दवा लेने की नियमितता में सुधार होगा और इलाज को लेकर हिचक दूर होगी।

मौजूदा दैनिक इंसुलिन से 40% तक सस्ता और इसके वेरिएंट्स

कंपनी ने इस साप्ताहिक इंसुलिन की कीमतों को काफी किफायती रखने का दावा किया है, जो वर्तमान में बाजार में उपलब्ध दैनिक बेसल इंसुलिन की तुलना में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक सस्ती पड़ेगी।

  • कीमत प्रति यूनिट: Awiqli की कीमत ₹3.73 प्रति यूनिट तय की गई है।
  • बाजार में दो वेरिएंट: यह दवा दो अलग-अलग पैक में उपलब्ध होगी। पहला वेरिएंट 1 मिलीलीटर (700 यूनिट) के पेन का है, जिसकी कीमत ₹2611 है। दूसरा वेरिएंट 3 मिलीलीटर (2,100 यूनिट) के पेन का है, जिसकी कीमत ₹7,833 निर्धारित की गई है।
  • साप्ताहिक खर्च का गणित: यदि किसी मरीज को प्रतिदिन 10 यूनिट इंसुलिन की आवश्यकता होती है, तो उसे पूरे सप्ताह में कुल 70 यूनिट इंसुलिन की जरूरत पड़ेगी। इस साप्ताहिक खुराक (70 यूनिट) की लागत करीब ₹261 (2.74 डॉलर) आएगी। इसके विपरीत, वर्तमान में बाजार में उपलब्ध दैनिक खुराक वाले बेसल इंसुलिन की 70 यूनिट की कीमत ₹345 से ₹453 के बीच बैठती है। यह दवा अगले सप्ताह से भारतीय बाजारों में बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएगी।

क्लिनिकल ट्रायल के बेहतर परिणाम और भारत की स्थिति

कंपनी के 'ONWARDS-1' क्लिनिकल प्रोग्राम से प्राप्त आंकड़ों और दावों के अनुसार, Awiqli ने रोजाना दी जाने वाली पारंपरिक 'इंसुलिन ग्लार्जिन U100' की तुलना में शरीर में HbA1c (औसत ब्लड शुगर) के स्तर को कम करने और ब्लड शुगर को निर्धारित तय सीमा के भीतर बनाए रखने में काफी बेहतर परिणाम प्रदर्शित किए हैं। कंपनी का यह भी दावा है कि इसके उपयोग से टाइप-2 डायबिटीज के अधिकांश मरीज बिना हाइपोग्लाइसीमिया (ब्लड शुगर का अत्यधिक कम होना) की स्थिति का सामना किए अपने HbA1c स्तर को 7 प्रतिशत से नीचे लाने में पूरी तरह सफल रहे हैं। इस दवा को इस वर्ष की शुरुआत में अमेरिका से मंजूरी मिल चुकी है और इसे यूरोपीय संघ सहित कई अन्य देशों में भी स्वीकृत किया गया है। भारत दुनिया का सातवां ऐसा देश बन गया है जहां इस अत्याधुनिक दवा को लॉन्च किया गया है।

देश में डायबिटीज का बढ़ता जाल और इंसुलिन बाजार

भारत में इस समय मधुमेह एक विशाल स्वास्थ्य समस्या का रूप ले चुका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश में लगभग 10.1 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज से सीधे तौर पर पीड़ित हैं, जबकि 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज (डायबिटीज की शुरुआती दहलीज) की स्थिति में जीवन जी रहे हैं। इसके अलावा, देश में 9 लाख से अधिक लोग टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित हैं, जिनके जीवन और इलाज का मुख्य आधार ही इंसुलिन है। वहीं, टाइप-2 डायबिटीज के भी लगभग 10 प्रतिशत मरीजों को अपने जीवनकाल में इंसुलिन थेरेपी की सख्त आवश्यकता पड़ती है।
मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोत्रिया के मुताबिक, वर्तमान समय में भारत में लगभग 60 लाख लोग विभिन्न माध्यमों से इंसुलिन थेरेपी ले रहे हैं। कंपनी को पूरी उम्मीद है कि निकट भविष्य में यह संख्या बढ़कर 90 लाख तक पहुंच जाएगी, जिससे कंपनी को व्यावसायिक स्तर पर भी बड़ा लाभ प्राप्त होगा। आईएमएआरसी (IMARC) के अनुमानों के मुताबिक, खराब खान-पान, गतिहीन जीवनशैली और आनुवंशिक कारणों से बढ़ते मरीजों के चलते भारत का इंसुलिन बाजार वर्ष 2025 के 660.5 मिलियन डॉलर से तीव्र गति से बढ़कर वर्ष 2034 तक 916.4 मिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच सकता है।

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