संक्षेप:
27 जुलाई 2026 को मुंबई से मिली जानकारी के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहकों का पर्सनल डेटा और इंटरनल डॉक्यूमेंट्स डार्क वेब पर लीक होने की खबर सामने आई है। साइबरसिक्योरिटी रिसर्चर श्रीकांत एल और सूत्रों के मुताबिक, 700GB से ज्यादा डेटा बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है। बैंक ने मामले की जांच हेतु फोरेंसिक ऑडिट शुरू कर दिया है। दावा है कि हैकर्स ने ईमेल सिस्टम को निशाना बनाकर बैंक के संवेदनशील डेटा तक पहुंच हासिल की है।
साइबर सेंधमारी से डार्क वेब पर उजागर हुआ संवेदनशील डेटा
सरकारी स्वामित्व वाले बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहकों की निजी जानकारी और बैंक के संवेदनशील आंतरिक दस्तावेज डार्क वेब पर कथित तौर पर लीक हो गए हैं। मामले से जुड़े सूत्रों और साइबरसिक्योरिटी रिसर्चर के अनुसार, इस डेटा लीक में ग्राहकों की व्यक्तिगत डिटेल्स, पहचान से जुड़े दस्तावेज, लोन से संबंधित कागजात और बैंक के आंतरिक ऑडिट रिकॉर्ड शामिल बताए जा रहे हैं। लीक की घटना के सामने आते ही बैंक ऑफ बड़ौदा ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक गहन फोरेंसिक ऑडिट शुरू कर दिया है। हालांकि, इस सुरक्षा चूक से कितने ग्राहक प्रभावित हुए हैं, इसकी सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसके अलावा, बैंक की ओर से इस डेटा ब्रीच के संबंध में स्टॉक एक्सचेंजों को भी फिलहाल कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है।
हैकर्स ने ईमेल सिस्टम में लगाई सेंध और 700GB डेटा की बिक्री का दावा
मामले की शुरुआती जांच के संकेतों के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि यह पूरी घटना बैंक के एक कंप्रोमाइज्ड या हैक हुए ईमेल सिस्टम के जरिए अंजाम दी गई है। हैकर्स ने ईमेल सिस्टम को निशाना बनाकर बैंक के संवेदनशील डेटा तक पहुंच हासिल की। 'कैशलेस कंज्यूमर' के फाउंडर और साइबरसिक्योरिटी रिसर्चर श्रीकांत एल ने वेबसाइट के मेटाडेटा एनालिसिस का हवाला देते हुए बताया कि यह डेटा शनिवार रात एक डार्क वेब प्लेटफॉर्म पर देखा गया था। डार्क वेब पर इस चुराए गए डेटा को 700 GB से भी अधिक जानकारी वाले डेटा कैशे के रूप में विज्ञापित किया जा रहा है। दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर अब तक बैंक ऑफ बड़ौदा, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और साइबर सुरक्षा नियामक CERT-In की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
कॉर्पोरेट सेक्टर में बढ़ती साइबर धमकियों का सिलसिला
वित्तीय संस्थानों और बड़ी कंपनियों के लिए साइबर सुरक्षा की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा से पहले जून महीने में एपल के सप्लायर 'टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स' पर हुए साइबर हमले के बाद एपल और इलॉन मस्क की कंपनी टेस्ला से जुड़े कंपोनेंट डिजाइन और स्पेसिफिकेशंस डार्क वेब पर लीक हो गए थे। इसके अलावा, इसी महीने की शुरुआत में 'वर्ल्ड लीक्स' नामक रैनसमवेयर ग्रुप ने भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट से जुड़ी फाइलों को डार्क वेब पर पोस्ट करने का दावा किया था।
डार्क वेब और फोरेंसिक ऑडिट को समझें
- डार्क वेब: यह इंटरनेट का एक अप्रत्यक्ष और गुप्त हिस्सा है, जिसे साधारण सर्च इंजन से नहीं खोला जा सकता। इसे एक्सेस करने के लिए टॉर (Tor) जैसे विशेष सॉफ्टवेयर की आवश्यकता होती है और इसका इस्तेमाल अक्सर अवैध गतिविधियों, डेटा चोरी और हैकिंग के लिए किया जाता है।
- फोरेंसिक ऑडिट: यह डिजिटल या वित्तीय प्रणालियों की एक तकनीकी जांच प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि सेंधमारी कैसे हुई, डेटा कहां से लीक हुआ और इसके पीछे क्या कारण थे, ताकि जांच रिपोर्ट को कानूनी साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सके।
ग्राहकों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
- पासवर्ड व PIN में बदलाव: बैंक ऑफ बड़ौदा के ग्राहक सतर्कता के तौर पर अपनी नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग ऐप के पासवर्ड और ATM PIN को तुरंत बदल लें।
- फिशिंग और संदिग्ध कॉल से सावधानी: किसी भी अज्ञात कॉल, एसएमएस या ईमेल पर अपनी गोपनीय जानकारी, OTP या CVV साझा न करें, क्योंकि बैंक कभी भी फोन पर ऐसी जानकारियां नहीं मांगता।