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भारत में सोने की मांग में 6% की आई गिरावट : अप्रैल-जून तिमाही में 131.4 टन रही कुल खपत

सारांश 

विश्व स्वर्ण परिषद (WGC) की रिपोर्ट के अनुसार भारत में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान सोने की मांग सालाना आधार पर 6% घटकर 131.4 टन रह गई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 139.7 टन थी। कस्टम ड्यूटी में बढ़ोतरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सोने की खरीदारी कम करने की अपील को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि, ऊंचे दामों के कारण वैल्यू के लिहाज से खपत 50% बढ़कर 1,98,100 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।


कस्टम ड्यूटी में वृद्धि और प्रधानमंत्री की अपील का बाजार पर दिखा असर

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में भारतीय बाजार में सोने की कुल मांग में 6% की कमी दर्ज की गई है। बीते वर्ष की समान अवधि में जहां 139.7 टन सोने की खपत हुई थी, वहीं इस वर्ष यह घटकर 131.4 टन पर आ गई। बाजार विशेषज्ञों और रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा इसी वर्ष मई महीने में सोना और चांदी के आयात शुल्क (कस्टम ड्यूटी) को 6% से बढ़ाकर 15% करने के फैसले से कीमतें बढ़ गईं, जिससे मांग प्रभावित हुई। इसके अलावा, मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से विदेशी मुद्रा भंडार की बचत के उद्देश्य से गैर-जरूरी सोने की खरीदारी कम करने की अपील की थी, जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव उपभोक्ताओं की खरीदारी पर देखा गया है।

ऊंचे दामों के चलते वैल्यू के मामले में बना नया रिकॉर्ड

भले ही वजन या मात्रा (वॉल्यूम) के हिसाब से सोने की खपत में गिरावट आई हो, लेकिन कुल मूल्य (वैल्यू) के मामले में यह आंकड़े रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। WGC इंडिया के रीजनल सीईओ सचिन जैन ने जानकारी दी कि समीक्षाधीन तिमाही के दौरान सोने की कुल खपत का मूल्य 1,98,100 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह आंकड़ा वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही के 1,32,500 करोड़ रुपये के मुकाबले 50% अधिक है। यह वृद्धि स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बाजार में अत्यधिक ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय उपभोक्ता सोने को एक प्रमुख निवेश और प्राथमिकता के रूप में देख रहे हैं।

आभूषणों की मांग में 15% की कमी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बढ़े दाम

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में देश के भीतर सोने के आभूषणों (ज्वैलरी) की मांग में 15% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। पिछले साल की समान अवधि में जहां 88.8 टन आभूषणों की खपत हुई थी, वहीं इस बार यह आंकड़ा घटकर 75.1 टन रह गया। मूल्य और दरों की बात करें तो दूसरी तिमाही में सोने की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत 4,506.3 डॉलर प्रति औंस रही, जो 2025 में 3,280.4 डॉलर प्रति औंस थी। वहीं, भारत में आयात शुल्क और जीएसटी के बिना औसत तिमाही कीमत 1,50,744.8 रुपये प्रति दस ग्राम रही, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह 94,875.9 रुपये दर्ज की गई थी।

वैश्विक स्तर पर स्थिर रही मांग, आने वाले त्योहारी सीजन से उम्मीदें

जहां एक तरफ भारत में सोने की मांग घटी है, वहीं वैश्विक स्तर पर कुल मांग में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया। अप्रैल-जून तिमाही में global लेवल पर सोने की कुल डिमांड 1,269 टन पर स्थिर रही, जो वर्ष 2025 की इसी तिमाही में 1,268.6 टन थी। WGC ने अनुमान जताया है कि भारत में इस पूरे वर्ष कुल सोने की मांग 650 से 750 टन के बीच रह सकती है। WGC इंडिया के रीजनल सीईओ सचिन जैन का मानना है कि आगामी त्योहारी सीजन और शादी-विवाह के मौकों पर भारतीय बाजार में सोने की मांग में पुनः तेजी आने की पूरी संभावना है।

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