सारांश
कानपुर के गोविंदनगर थाना क्षेत्र में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है। साल 2024 में बीटेक टॉप करने वाले और राज्यपाल द्वारा गोल्ड मेडल से सम्मानित 23 वर्षीय छात्र आनंद ने सरकारी नौकरी न मिलने से परेशान होकर कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्र का शव गुजैनी स्थित घर में पंखे से लटका मिला। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें मृतक ने अपने पिता से माफी मांगते हुए 50 बार परीक्षा देने के बाद भी सफल न होने का दर्द बयां किया है।
सुनहरे भविष्य का दुखद अंत, कमरे से मिला पांच लाइन का सुसाइड नोट
कानपुर के गोविंदनगर थाना क्षेत्र के गुजैनी इलाके में एक होनहार छात्र द्वारा आत्मघाती कदम उठाने का मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक छात्र आनंद (23 वर्ष) ने अपने कमरे में फंदे से लटककर अपनी जान दे दी। पुलिस को घटनास्थल से पांच लाइन का एक बेहद भावुक सुसाइड नोट मिला है। सुसाइड नोट में मृतक ने कथित तौर पर लिखा है, "सॉरी पापा... मैंने 50 बार सरकारी नौकरी पाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो पाया। मुझे माफ कर देना।" गोविंदनगर थाना प्रभारी अशोक कुमार दुबे के मुताबिक, शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि सरकारी नौकरी न मिलने के कारण छात्र अत्यधिक तनाव और डिप्रेशन में था, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया। पुलिस फिलहाल मामले की गहनता से जांच कर रही है।
राज्यपाल के हाथों मिला था गोल्ड मेडल, पूरे प्रदेश में आई थी तीसरी रैंक
मृतक आनंद पढ़ाई-लिखाई में बेहद मेधावी था। उसने साल 2024 में कानपुर के पीएसआईटी (PSIT) कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की थी। बीटेक में उसने न सिर्फ कॉलेज टॉप किया था, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश में तीसरी रैंक हासिल की थी। उसकी इस शानदार सफलता पर 13 अगस्त 2024 को कॉलेज में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान सूबे की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उसे गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया था। बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद आनंद ने चकरपुर स्थित पावर ग्रिड से एक साल की अप्रेंटिसशिप भी पूरी की थी, जिसके बाद से वह लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटा हुआ था।
जब घर में कोई नहीं था तब उठाया कदम, नौकरानी की सूचना पर पहुंची पुलिस
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, आनंद का मूल परिवार बिहार के बक्सर का रहने वाला है। उसके पिता राजकुमार, लोहिया प्राइवेट लिमिटेड से रिटायर्ड हैं और कानपुर के गुजैनी में अपने तीन मंजिला मकान में आनंद के साथ रहते थे। आनंद के बड़े भाई अमित और बहन प्रिया बिहार में ही सरकारी शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं, जबकि उसकी मां शांति देवी का साल 2011 में एक बीमारी के कारण निधन हो गया था। पिता राजकुमार ने बताया कि करीब पांच दिन पहले वे बड़े बेटे अमित की शादी के लिए लड़की देखने बिहार गए थे। आनंद को भी साथ जाना था, लेकिन ऐन वक्त पर उसने कानपुर में ही रुकने की बात कहकर जाने से मना कर दिया। 17 जुलाई (शुक्रवार) को दोपहर करीब 1 बजे जब घर में काम करने वाली नौकरानी पहुंची, तो काफी देर तक खटखटाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला। अनहोनी की आशंका होने पर उसने तुरंत परिजनों और गोविंदनगर पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब दरवाजा तोड़ा, तो कमरे के अंदर आनंद का शव पंखे के सहारे फंदे से लटका हुआ पाया गया।
रेलवे से लेकर बैंक तक दी थीं परीक्षाएं, शनिवार शाम हुआ अंतिम संस्कार
पिता राजकुमार के अनुसार, आनंद अप्रेंटिसशिप पूरी करने के बाद घर पर ही रहकर पूरी शिद्दत से सरकारी नौकरी की तैयारी में व्यस्त था। उसने रेलवे, एसएससी (SSC), बैंक और सरकारी शिक्षक भर्ती सहित विभिन्न विभागों की करीब 50 परीक्षाएं दी थीं, लेकिन लगातार प्रयास के बाद भी उसे मनमुताबिक सफलता हाथ नहीं लग रही थी। इसी वजह से वह लंबे समय से मानसिक तनाव और डिप्रेशन से गुजर रहा था। घटना की सूचना मिलते ही परिवार के सदस्य बिहार से आनन-फानन में कानपुर पहुंचे। शनिवार को पुलिस द्वारा शव का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद शाम करीब 5 बजे भैरव घाट पर परिजनों की मौजूदगी में मृत छात्र का अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।