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यूपी-ख़बरें : डीएल एजेंसियों के भ्रष्टाचार पर भड़के सीएम योगी; राम मंदिर संचालन के लिए पहली बार नियुक्त होगा पेशेवर सीईओ; गोरखपुर में युवती से मारपीट मामले में 5 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

सारांश 
मुख्यमंत्री योगी ने जनता दर्शन में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) एजेंसियों द्वारा भर्ती के नाम पर की गई भ्रष्टाचार व कथित अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर परिवहन विभाग के प्रति गहरी नाराजगी जताई, जिसके बाद विभाग एफआईआर और जांच के लिए सक्रिय हो गया है। दूसरी ओर, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के प्रशासनिक, वित्तीय और सुरक्षा प्रबंधन को पेशेवर बनाने के लिए पहली बार एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का पद सृजित कर एक अनुभवी और निष्कलंक छवि वाले व्यक्ति की तलाश शुरू की है। गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में 9 जुलाई को कार-बाइक की टक्कर के बाद एक युवती से हुई मारपीट के दौरान कथित तौर पर मूकदर्शक बने रहने और वीडियो बनाने के आरोप में एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।


1. ड्राइविंग लाइसेंस एजेंसियों के भ्रष्टाचार व लूट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सख्त, नाराज होकर पूछा- ऐसी कंपनियों को क्यों दिया गया काम

मुख्यमंत्री के सामने खुला भ्रष्टाचार का मामला

सोमवार, 13 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दर्शन में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनाने, प्रिंट व डिलीवर करने वाली निजी एजेंसियों के हाथों शोषण के शिकार पीड़ित कर्मचारी पहुंचे। अखिलेश कुमार और अनुज कुमार समेत अन्य पीड़ितों ने मुख्यमंत्री को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि सिल्वर टच, रोजमार्टा व फोकाम जैसी एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भर्ती के नाम पर उनसे कथित तौर पर तीन से चार लाख रुपये की अवैध वसूली की। इतना ही नहीं, कर्मचारियों के पैसों से ही कंप्यूटर व यूपीएस भी लगवाए गए। जब इन प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों से उनकी सैलरी का पैसा एडवांस में मांगा और उन्होंने मना कर दिया, तो 40 कर्मियों को नौकरी से बाहर निकाल दिया गया। इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि ऐसी कंपनियों को परिवहन विभाग ने काम ही क्यों दिया और पीड़ितों को न्याय दिलाने का पूरा भरोसा दिया।


अफसरों की कथित शह पर छह महीने से चल रही थी लूट

परिवहन विभाग में तैनात इन एजेंसियों के अधीन करीब 320 कर्मचारी प्रदेशभर में कार्यरत हैं। सूत्रों के अनुसार, इन एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने कथित रूप से विभागीय अफसरों की शह पर इस बड़ी लूटपाट को अंजाम दिया। पिछले छह महीनों से पीड़ित कर्मचारी परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के चक्कर काट रहे थे, लेकिन उनकी सुनवाई करने के बजाय उन्हें हर बार टरका दिया जाता था। पूर्व परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने भी इस मामले में जांच के आदेश देकर 25 जिलाधिकारियों को पत्र लिखे थे, लेकिन वह जांच रिपोर्ट ठंडे बस्ते में चली गई। हद तो यह रही कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से दी गई जांच की सिफारिश वाले पत्र को भी अफसरों ने दरकिनार कर दिया और एजेंसियों से कथित साठगांठ के चलते एक भी मामले में जांच नहीं होने दी।

सीएम की फटकार के बाद एक्टिव हुआ परिवहन विभाग

मुख्यमंत्री की कड़ी नाराजगी के बाद पिछले कई महीनों से इस मामले में चुप्पी साधे बैठे परिवहन विभाग के अधिकारी अचानक सक्रिय हो गए। जो अफसर पहले पीड़ित प्राइवेट कर्मियों से मिलने तक को तैयार नहीं थे, उन्होंने सोमवार को तत्काल पीड़ितों से संपर्क कर उन्हें मुख्यालय बुलाया और उनकी शिकायतें दर्ज कीं। इस संबंध में परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन ने बताया कि एजेंसियों से निकाले गए कर्मियों की शिकायतें ले ली गई हैं और संबंधित जिलों में इन डीएल एजेंसियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके साथ ही पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी।

2. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार सृजित किया मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पद, बंगला और लग्जरी गाड़ी समेत मिलेंगी वीआईपी सुविधाएं

राम मंदिर के प्रबंधन को पूरी तरह पेशेवर बनाने की कवायद

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अयोध्या में नवनिर्मित राम मंदिर के दैनिक संचालन, प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे को आधुनिक एवं पारदर्शी मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रस्ट द्वारा पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का एक पूर्णकालिक प्रशासनिक पद सृजित किया गया है। नवनियुक्त सीईओ के कंधों पर प्रतिदिन मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुगम दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन, मंदिर परिसर के समग्र संचालन, ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन, चढ़ावे की निगरानी, ऑडिट व्यवस्था तथा परिसर में चल रहे विभिन्न निर्माण व विकास कार्यों की गहन मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी होगी। यह अधिकारी पूरी तरह से ट्रस्ट के महामंत्री के प्रति उत्तरदायी होगा और संस्था के सभी वैधानिक कार्यों का संचालन करेगा।


वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के समकक्ष वेतन और लग्जरी सुविधाएं

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त होने वाले अधिकारी को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के समकक्ष एक बेहद आकर्षक वेतन दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, अधिकारी की सुविधाओं का पूरा ख्याल रखते हुए ट्रस्ट अपने निजी संसाधनों से अयोध्या में एक सर्वसुविधायुक्त बंगला (आवास), आधिकारिक लग्जरी वाहन, चालक, सुरक्षा कर्मी, कैंप कार्यालय, चिकित्सा सुविधा, यात्रा भत्ता और संचार संबंधी अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

योग्यता के कड़े मापदंड और निष्कलंक छवि की तलाश

विश्वस्तरीय धार्मिक परिसर के कुशल नेतृत्व के लिए ट्रस्ट एक अनुभवी और पूरी तरह निष्कलंक छवि वाले व्यक्ति की तलाश कर रहा है। इसके लिए कड़े मापदंड निर्धारित किए गए हैं, जिसके तहत आवेदक का न्यूनतम स्नातक होना अनिवार्य है तथा उसकी आयु 50 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए। इसके अलावा, उम्मीदवार के पास किसी बड़े सार्वजनिक संगठन, सरकारी विभाग, प्रतिष्ठित संस्था या कंपनी में न्यूनतम 20 वर्षों का प्रबंधकीय अनुभव होना आवश्यक है। यह अनुभव मुख्य रूप से सामान्य प्रशासन, वित्त, लेखा, कार्मिक, जनसंपर्क, आईटी, सुरक्षा और विधिक मामलों जैसे बहुआयामी क्षेत्रों के कुशल समन्वय एवं नेतृत्व का होना चाहिए।

3. गोरखपुर में युवती से बीच सड़क बर्बरता मामले में बड़ी कार्रवाई, 2 थाना प्रभारी लाइन हाजिर और 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड


पुलिसकर्मियों पर तमाशबीन बने रहने का आरोप



गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में एक युवती के साथ बीच सड़क पर हुई गंभीर मारपीट की घटना में पुलिस महकमे ने बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि जब दबंग युवती को सरेराह पीट रहे थे, तब मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी स्थिति को नियंत्रित करने के बजाय कथित रूप से मूकदर्शक बने रहे और कुछ पुलिसकर्मी घटना को रोकने की जगह अपने मोबाइल से उसका वीडियो बनाने में व्यस्त थे। वीडियो सामने आने के बाद एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने रविवार, 12 जुलाई 2026 की देर रात 12 बजे बड़ी कार्रवाई करते हुए शाहपुर थाना प्रभारी राकेश रोशन सिंह और कौवाबाग चौकी प्रभारी दुर्गेश नंदिनी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया। इसके अतिरिक्त, मौके पर मौजूद पीआरवी के दो सिपाहियों राज मंगल सिंह, अविनाश यादव और दरोगा अभिषेक कुमार सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है, जबकि ड्यूटी से गायब रहने वाले होमगार्ड हरिचरन राय के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई है।

9 जुलाई की शाम को कार-बाइक की टक्कर के बाद भड़की थी हिंसा

यह पूरी वारदात गुरुवार, 9 जुलाई 2026 की शाम करीब 6:30 बजे की है, जब 24 वर्षीय पीड़ित युवती अपने बीमार पिता का इलाज कराने कार से रेलवे हॉस्पिटल जा रही थी। रास्ते में उसकी कार की टक्कर एक बाइक से हो गई, जिसके बाद दोनों पक्षों में विवाद हुआ। आरोप है कि बाइक सवार ने अपने साथियों को फोन कर बुला लिया, जो कुछ ही देर में एक काली स्कॉर्पियो से मौके पर पहुंच गए। इन लड़कों ने युवती पर हमला कर उसे लात-घूंसों व बेल्ट से पीटना शुरू कर दिया, उसके बाल पकड़कर घसीटा, कपड़े फाड़ने की कोशिश की और गलत तरीके से छुआ। घटना के सामने आए वीडियो में आरोपी युवती के सिर पर किसी भारी चीज से प्रहार करते और उसकी कार का शीशा तोड़ते नजर आए, जबकि कुछ दूरी पर उसके पिता बेबस खड़े थे। इस मामले में 10 जुलाई की सुबह 10 बजे अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, जिसे पुलिस ने पहले हल्के में लिया था लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद इसमें हत्या के प्रयास और छेड़खानी जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी गईं।

मुख्य आरोपी राज निषाद गिरफ्तार, संदिग्धों से पूछताछ जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए 3 विशेष टीमें गठित की हैं। एसपी सिटी निमिष पाटिल के अनुसार, घटना के मुख्य आरोपी राज निषाद, जो पादरी बाजार के मोहनापुर का रहने वाला है, उसे पुलिस द्वारा पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, छेड़खानी, मारपीट और धमकी समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। इसके अलावा, पुलिस ने आठ अन्य संदिग्ध युवकों को भी हिरासत में लिया है, जिनसे गहन पूछताछ की जा रही है और बाकी बचे आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

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