सारांश
सोमवार को मुरादाबाद कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर बुलडोजर कार्रवाई के आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आईजी किरण एस के नेतृत्व में नई SIT गठित कर सीए को शामिल करने और दो हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। इधर, 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट किया कि 67,867 नियुक्त शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित रहेगी, संशोधित मेरिट लिस्ट में नए अभ्यर्थी पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें उपलब्ध रिक्त पदों पर संयोजित किया जाएगा।
1. आजम खां की जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत: 38 भवनों के ध्वस्तीकरण आदेश पर मंडलायुक्त ने लगाई रोक
आरडीए के बुलडोजर एक्शन पर अंतरिम स्टे
रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी के 40 में से 38 भवनों को बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्मित बताते हुए अवैध घोषित किया गया था और उनके ध्वस्तीकरण के आदेश जारी किए गए थे। इस आदेश के खिलाफ जौहर ट्रस्ट ने मंडलायुक्त न्यायालय में वैधानिक अपील दाखिल की थी। सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए मुरादाबाद कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह ने अंतरिम आदेश जारी कर आरडीए की ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। इस फैसले के बाद फिलहाल विश्वविद्यालय पर बुलडोजर की कार्रवाई नहीं होगी।
विरोध प्रदर्शन और आगे की कानूनी प्रक्रिया
आरडीए के कार्रवाई आदेश के बाद से विश्वविद्यालय प्रशासन, जौहर ट्रस्ट, कर्मचारी और छात्र लगातार विरोध जता रहे थे। परिसर में छात्रों का धरना भी कई दिनों से चल रहा था। जौहर ट्रस्ट के अनुसार, प्राधिकरण ने सभी दस्तावेजों और तथ्यों पर समुचित विचार किए बिना ही यह फैसला लिया था, जिसके चलते उन्होंने मंडलायुक्त न्यायालय के साथ-साथ हाईकोर्ट का रुख भी किया था। अब मामले की अगली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
2. राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सुप्रीम कोर्ट का निर्देश- SIT में CA शामिल करें, दो हफ्ते में दें जांच रिपोर्ट
नई SIT का गठन और सीए को शामिल करने का आदेश
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोमवार दोपहर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि आईजी किरण एस के नेतृत्व में नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन कर दिया गया है। इस टीम में अयोध्या के डीआईजी सोमेन वर्मा, एसएसपी गौरव ग्रोवर और एक एएसपी को शामिल किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि वित्तीय अपराधों और रिकॉर्ड्स की गहन जांच के लिए इस नई एसआईटी में फोरेंसिक ऑडिटर (सीए) को भी शामिल किया जाए। अदालत ने एसआईटी को दो सप्ताह के भीतर जांच की स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
पारदर्शिता का सुझाव और आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ी
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट देवदत्त कामत ने सुझाव दिया कि श्रद्धालुओं द्वारा दान की जाने वाली राशि में पारदर्शिता के लिए ट्रस्ट को प्राप्त दान का विवरण सार्वजनिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे पहले इस मामले की जांच लखनऊ मंडल के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाली समिति कर रही थी। वहीं, दूसरी ओर एंटी करप्शन कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किए गए मामले के सभी आठों आरोपियों—रामशंकर यादव उर्फ 'टिन्नू', अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, मनीष यादव और रिटायर्ड बैंक कर्मचारी सुभाष श्रीवास्तव—की न्यायिक हिरासत कोर्ट ने 14 दिनों के लिए और बढ़ा दी है।
3. यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती: सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिया हलफनामा, 67 हजार शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित
सुप्रीम कोर्ट में सरकार का रुख
उत्तर प्रदेश सरकार ने 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि साल 2020 में नियुक्त किए गए 67,867 शिक्षकों की नौकरी नहीं जाएगी। सरकार के अनुसार, यदि इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशानुसार तैयार की गई संशोधित मेरिट लिस्ट में नए अभ्यर्थी पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें उपलब्ध रिक्त पदों पर संयोजित किया जाएगा। सरकार ने कोर्ट से यह भी कहा है कि यह व्यवस्था केवल इसी भर्ती तक सीमित रहेगी और इसे भविष्य की किसी भर्ती के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा।
आरक्षण विवाद और कानूनी प्रक्रिया की पृष्ठभूमि
यह भर्ती परीक्षा 6 जनवरी 2019 को आयोजित की गई थी। इसके बाद परिणाम घोषित होने पर अभ्यर्थियों ने बेसिक एजुकेशन रूल 1981 और रिजर्वेशन रूल 1994 के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए धरना-प्रदर्शन किए थे। अभ्यर्थियों का दावा था कि आरक्षित वर्ग (OBC व SC) को नियमानुसार सीटें नहीं दी गईं। 13 अगस्त 2024 को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पूरी भर्ती की नई मेरिट लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए थे, जिस पर 9 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सरकार ने संशोधित मेरिट लिस्ट तैयार कर ली है ताकि पुराने कार्यरत शिक्षकों को प्रभावित किए बिना नए पात्र उम्मीदवारों को भी अवसर दिया जा सके।