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उत्तराखंड के 349 पुलों का होगा आधुनिकीकरण : अब आपदाओं में संपर्क टूटने से लोगों को मिलेगी निजात

संक्षेप:
27 जुलाई 2026 को देहरादून से मिली जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग (PWD) ने उत्तराखंड में आपदाओं के दौरान मार्गों का संपर्क टूटने से रोकने के लिए एक विशेष मास्टर प्लान तैयार किया है। मीडिया रिपोर्ट्स में चीफ इंजीनियर राजेश शर्मा के अनुसार, 2030 तक 349 पुराने पुलों को 'क्लास-ए' मानकों पर अपग्रेड किया जाएगा। इससे पहाड़ी क्षेत्रों, मरीजों, सेना की आपूर्ति और चारधाम यात्रा को बड़ी राहत मिलेगी।


आपदा के समय पहाड़ी इलाकों की लाइफलाइन बनेंगे मजबूत पुल

उत्तराखंड में बरसात और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पुल क्षतिग्रस्त होने से कई गांवों और पूरी घाटियों का मुख्य मार्गों से संपर्क कट जाना एक गंभीर समस्या रही है। इस बड़े संकट का स्थायी समाधान निकालने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने वर्ष 2026 से 2031 तक के लिए एक मास्टर प्लान बनाया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य केवल नए पुल बनाना नहीं है, बल्कि मौजूदा पुलों को इतना मजबूत करना है कि वे बाढ़, तेज बहाव, भूकंप और भारी वाहनों का दबाव आसानी से झेल सकें। इन पुलों के मजबूत होने से आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य तेज होंगे, मरीजों का अस्पताल पहुंचना आसान होगा और सेना व अर्धसैनिक बलों की लॉजिस्टिक आपूर्ति के साथ-साथ पर्यटन व कृषि उत्पादों की ढुलाई बिना बाधा के हो सकेगी।

349 पुलों का अपग्रेडेशन और ADB के सहयोग से आधुनिकीकरण

योजना के पहले चरण के तहत, सरकार ने 104 राज्य राजमार्गों पर स्थित 349 पुलों को 'क्लास-ए' लोडिंग मानकों के अनुसार अपग्रेड करने का खाका तैयार किया है। विभाग का लक्ष्य इस चरण को वर्ष 2030 तक पूरा करना है ताकि आपातकालीन सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित हो सके। लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर राजेश शर्मा के अनुसार, एशियाई विकास बैंक (ADB) के सहयोग से राज्य के 235 पुलों का भी आधुनिकीकरण किया जा रहा है। इन पुलों में 'क्लास-70आर' भार क्षमता, भूकंपरोधी डिजाइन और आधुनिक बाढ़ सुरक्षा तकनीकों का उपयोग किया जाएगा, जिससे भविष्य की जलवायु चुनौतियों के सामने इन ढांचों की उम्र और सहनशीलता दोनों बढ़ेंगी।

1,200 पुराने पुलों की चिंता और असुरक्षित स्थानों पर नए निर्माण

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में वर्तमान में कुल 3,559 पुल (2,009 मोटर पुल और 1,205 पैदल पुल) हैं, जिनमें 345 राष्ट्रीय राजमार्गों और 3,214 राज्य सरकार के अधीन हैं। चिंता की बात यह है कि करीब 1,200 पुल आज भी पुराने 'क्लास-बी' मानकों पर बने हैं, जो आधुनिक भारी ट्रकों के लिए उपयुक्त नहीं हैं। सर्वाधिक पुराने और संवेदनशील ढांचे चमोली, पौड़ी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ और टिहरी जिलों में हैं। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2022 के सर्वेक्षण में कथित तौर पर 91 पुल असुरक्षित पाए गए थे। इनमें से 76 की मरम्मत पूरी हो चुकी है और शेष 15 का पुनर्निर्माण मार्च 2027 तक करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, राज्य के 30 दुर्गम स्थानों पर जहां आज भी लोग मैनुअल ट्रॉली से नदी पार करते हैं, वहां आठ पुलों का निर्माण जारी है और 15 की डीपीआर तैयार की जा रही है। सरकार का लक्ष्य 2028 तक इन क्षेत्रों में स्थायी पुल बनाकर लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा देना है।

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