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राम मंदिर की व्यवस्थाओं में 22 जुलाई के बाद बड़े बदलाव की तैयारी : दर्शन से लेकर चढ़ावा प्रबंधन तक बदलेगा स्वरूप

सारांश 

अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा 22 जुलाई 2026 को प्रस्तावित बैठक के बाद राम मंदिर की व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव किए जाने की संभावना है। इसके तहत दर्शन व्यवस्था, पूजा-पद्धति, चढ़ावा प्रबंधन और सुरक्षा को अधिक पारदर्शी व श्रद्धालु-अनुकूल बनाया जाएगा। संतों और रामानंदीय परंपरा के विद्वानों के सुझावों के आधार पर इन व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसके अलावा मंदिर के सीईओ की नियुक्ति पर निर्णय संभव है।


व्यवस्थाओं को आधुनिक और पारदर्शी बनाने पर मंथन

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा 22 जुलाई 2026 के बाद राम मंदिर की संपूर्ण व्यवस्थाओं में व्यापक स्तर पर बदलाव लागू करने की तैयारी कथित तौर पर की जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मंदिर में दर्शन व्यवस्था, राग-भोग, पूजा-पद्धति, श्रद्धालु सुविधाओं और प्रशासनिक प्रणाली को अधिक सुव्यवस्थित एवं पारदर्शी बनाने के लिए ट्रस्ट नए सिरे से विचार-विमर्श कर रहा है। इन नई व्यवस्थाओं को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए अयोध्या के स्थानीय संतों और रामानंदीय परंपरा के विद्वानों से मिले महत्वपूर्ण सुझावों को भी शामिल किया जा रहा है।

ट्रस्ट की बैठक में नए पदाधिकारियों का हो सकता है चयन

दावा किया जा रहा है कि 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की प्रस्तावित बैठक के बाद इन सभी नई व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। हाल के दिनों में सामने आए घटनाक्रमों को देखते हुए ट्रस्ट मंदिर की कार्यप्रणाली को और अधिक सुदृढ़, आधुनिक एवं जवाबदेह बनाने के पक्ष में नजर आ रहा है। इसके साथ ही, इस महत्वपूर्ण बैठक में ट्रस्ट के नए महासचिव का चुनाव करने और रिक्त पड़े पदों पर नए सदस्यों का चयन किए जाने की बात भी लगभग तय मानी जा रही है।

रामानंदीय परंपरा के अनुसार पूजा-विधि पर विशेष जोर

राम मंदिर की पूजा-पद्धति को पूर्ण रूप से रामानंदीय परंपरा के अनुरूप व्यवस्थित करने की कवायद भी तेज हो गई है। इसी सिलसिले में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के संरक्षक दिनेश चंद्र ने निर्मोही अखाड़ा के महंत और राम मंदिर के ट्रस्टी दिनेंद्र दास से मुलाकात की और पूजा-पद्धति को लेकर विस्तृत सुझाव लिए। महंत दिनेंद्र दास ने निर्मोही अखाड़ा में होने वाली पारंपरिक पूजा-विधि की जानकारी साझा करते हुए कहा कि राम मंदिर में भी शास्त्रीय विधि-विधान और परंपराओं का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित होना चाहिए। हाल ही में उन्होंने पूजा-पद्धति को लेकर कुछ सुझाव दिए थे, जिसके बाद विहिप नेतृत्व ने उनसे विस्तार से चर्चा कर उनकी राय जानी है।

सुरक्षा, भीड़ और चढ़ावा प्रबंधन में किए जाएंगे आवश्यक सुधार

ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य मंदिर की प्रशासनिक प्रणाली को आधुनिक बनाने के साथ-साथ सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, राग-भोग और सेवा व्यवस्था में आवश्यक सुधार करना है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी ने भी संकेत दिए हैं कि संत समाज द्वारा दिए गए सुझावों पर बेहद गंभीरता के साथ काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि संतों के विचारों के आधार पर व्यवस्थाओं को और अधिक उन्नत बनाया जाएगा, ताकि अयोध्या का राम मंदिर देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक आदर्श, अनुशासित और पारदर्शी व्यवस्था का बेहतरीन उदाहरण बन सके।

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