सारांश
भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच बहुप्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आगामी 15 जुलाई से आधिकारिक तौर पर लागू होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समझौते के लागू होने के बाद भारत में यूके की लग्जरी कारें, स्कॉच व्हिस्की, ब्रांडेड कपड़े और ब्रांडेड कॉस्मेटिक्स सस्ते हो जाएंगे, जबकि भारत के 99% सामानों को यूके के बाजार में जीरो टैरिफ (बिना किसी टैक्स) पर एंट्री मिलेगी। दोनों देशों के बीच हुए इस समझौते से साल 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई गई है।
नई दिल्ली: 7 दिन बाद लागू होगी भारत-यूके ऐतिहासिक व्यापार डील, बदल जाएंगे कई सामानों के दाम
भारत और ब्रिटेन के बीच आर्थिक संबंधों को एक नया आयाम देने वाला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अब से ठीक 7 दिन बाद यानी 15 जुलाई से प्रभावी हो जाएगा। इस समझौते के तहत भारत से निर्यात होने वाले 99% सामानों पर यूके में कोई टैक्स नहीं लगेगा, वहीं यूके से भारत आने वाले 99% सामानों पर औसत टैरिफ घटकर महज 3% रह जाएगा। भारत में यूके की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे आधुनिक यूके-भारत पार्टनरशिप के लिए एक 'ऐतिहासिक पल' बताया है, जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए विकास के एक नए युग की शुरुआत करेगा।
जानिए भारत में कौन-कौन सी चीजें हो जाएंगी सस्ती
दावा किया जा रहा है कि इस समझौते के लागू होने से यूके से आयात होने वाले सामानों पर लगने वाला औसत टैक्स 15% से घटकर 3% पर आ जाएगा। इसके अलावा करीब 85% सामान अगले 10 वर्षों में पूरी तरह से टैक्स-मुक्त हो जाएंगे।
- व्हिस्की और जिन: यूके से आने वाली स्कॉच व्हिस्की और जिन पर लगने वाली 150% की ड्यूटी घटकर शुरुआत में 75% हो जाएगी और समझौते के 10वें साल तक इसे 40% कर दिया जाएगा। उदाहरण के तौर पर, 5000 रुपए वाली स्कॉच की बोतल कथित तौर पर 3500 रुपए में मिल सकेगी।
- लग्जरी कारें: जगुआर लैंड रोवर और रोल्स-रॉयस जैसी लग्जरी ब्रिटिश कारों पर लगने वाला 100% का टैरिफ कोटा सिस्टम के तहत केवल 10% तक रह जाएगा, जिससे इनकी कीमतों में 20 से 30% तक की गिरावट आ सकती है।
- कपड़े, कॉस्मेटिक्स और फूड प्रोडक्ट्स: ब्रिटेन से आने वाले ब्रांडेड कपड़े, चॉकलेट, बिस्किट, सॉफ्ट ड्रिंक्स, सैल्मन, लैंब, कॉस्मेटिक्स, मेडिकल डिवाइसेज और एयरोस्पेस पार्ट्स भी सस्ते दामों पर उपलब्ध होंगे। इसके अलावा फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में भी कमी आएगी।
भारतीय टेक्सटाइल, फार्मा और अन्य सेक्टर्स को मिलेगा भारी मुनाफा
इस डील से भारत के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों को वैश्विक बाजार में बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है:
- टेक्सटाइल और चमड़ा उद्योग: यूके में भारतीय कपड़ों, चादरों और पर्दों पर लगने वाला 8-12% टैक्स पूरी तरह खत्म होने से यह बांग्लादेश और वियतनाम के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। इससे सूरत, तिरुप्पुर और लुधियाना जैसे हब में 40% तक की ग्रोथ का अनुमान है। गहने और चमड़े के सामान (बैग, जूते) पर टैक्स खत्म होने से MSME को सीधा लाभ होगा।
- इंजीनियरिंग, फार्मा और फूड एक्सपोर्ट: यूके ने भारतीय ऑटो पार्ट्स और मशीनरी पर इम्पोर्ट टैक्स हटा दिया है, जिससे पुणे, चेन्नई और गुड़गांव के मैन्युफैक्चरिंग हब को मजबूती मिलेगी। भारतीय दवा कंपनियों को यूके की हेल्थ सर्विस (NHS) में जेनेरिक दवाओं के लिए आसान और त्वरित अप्रूवल मिलेगा। बासमती चावल, मसाले, प्रीमियम चाय और झींगा जैसे समुद्री उत्पादों पर भी टैक्स खत्म होने से असम, केरल, गुजरात और पश्चिम बंगाल के एक्सपोर्ट को बूस्ट मिलेगा। इसके अलावा गुजरात और महाराष्ट्र से एग्रोकेमिकल्स का निर्यात 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य है।
रोजगार, निवेश और भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा सीधा असर
इस मुक्त व्यापार समझौते से भारत को कई मोर्चों पर आर्थिक लाभ होने का अनुमान लगाया गया है। शून्य टैरिफ की बदौलत साल 2030 तक भारत का यूके को निर्यात 29 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। कपड़ा और चमड़ा जैसे लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स में रोजगार के अवसर दोगुने होने की संभावना है, जिससे भारत के करीब 6 करोड़ MSME को नए बाजार और बेहतर मार्जिन मिलेंगे। साथ ही, यूके की कंपनियां भारत के आईटी, फाइनेंशियल सर्विसेज और ग्रीन एनर्जी (सोलर, ग्रीन हाइड्रोजन, ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर) में अपना निवेश बढ़ाएंगी, जो देश के आर्थिक विकास की रफ्तार को 15% सालाना तक बढ़ा सकता है।
साढ़े तीन साल की बातचीत और समझौते का पूरा घटनाक्रम
भारत और यूके के बीच इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते को लेकर बातचीत की शुरुआत 13 जनवरी 2022 को हुई थी। करीब 3.5 साल के भीतर 14 राउंड की लंबी वार्ता के बाद 24 जुलाई 2025 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर की मौजूदगी में इस डील पर हस्ताक्षर किए थे। भारत की केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब यह 15 जुलाई से धरातल पर उतरने के लिए तैयार है।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के विश्लेषण के अनुसार, भारत ने अब अपना ध्यान पूर्व (जापान, कोरिया, आसियान) से हटाकर पश्चिमी देशों की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की ओर केंद्रित किया है, जिसके तहत वर्तमान में यूरोपियन यूनियन (EU) और अमेरिका (US) के साथ भी इसी तरह के समझौतों पर सक्रियता से बातचीत चल रही है। इससे पहले भारत मॉरीशस, यूएई, ऑस्ट्रेलिया और ईएफटीए (EFTA) जैसे देशों व ब्लॉक्स के साथ भी व्यापार समझौते कर चुका है।