सारांश
देश में आगामी त्योहारों से ठीक पहले खाद्य तेलों के दाम बढ़ने से रसोई का बजट बिगड़ने की पूरी संभावना जताई जा रही है। काला सागर क्षेत्र में जारी रूस-यूक्रेन युद्ध और जहाजों की आवक में हो रही 60 दिनों तक की देरी के कारण आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। इसके साथ ही घरेलू स्तर पर तिलहन बुवाई में गिरावट और वैश्विक स्तर पर आयात घटने से आने वाले महीनों में सूरजमुखी, पाम, सोयाबीन और सरसों तेल के खुदरा दामों में 8 से 12 फीसदी तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय संकट और काला सागर में मालवाहक जहाजों की जहाजरानी में हो रही देरी
खाद्य तेलों की आपूर्ति में आए इस संकट का मुख्य कारण वैश्विक युद्ध और समुद्री मार्गों में सुरक्षा की कमी है। दुनिया के कुल सूरजमुखी तेल निर्यात में रूस और यूक्रेन की हिस्सेदारी लगभग 63 फीसदी है। यूक्रेन द्वारा रूसी बंदरगाहों पर किए गए ड्रोन हमलों के कारण काला सागर का समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गया है, जिससे भारत आने वाले दर्जनों आयातकों के जहाज वहां फंस गए हैं और आपूर्ति में 60 दिनों तक की देरी हो रही है।
इसके अलावा, सॉल्वेंट एक्सट्रैक्ट एसोशिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, चालू तेल वर्ष (2025-26) के जून 2026 में भारत का खाद्य तेल आयात सालाना आधार पर 29 फीसदी तक घटा है। जहां मई 2026 में 13.39 लाख टन खाद्य तेल आयात हुआ था, वहीं जून में यह गिरकर 11.11 लाख टन पर आ गया। इस दौरान पाम तेल का आयात 10.5 फीसदी घटकर 4.87 लाख टन तथा सोयाबीन तेल का आयात 23 फीसदी गिरकर 3.81 लाख टन रह गया है।
देश में कमजोर मानसून से तिलहन बुवाई पिछड़ी और खाद्य तेलों के मौजूदा दाम
घरेलू स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इस साल कमजोर मानसून की वजह से तिलहन की बुवाई पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 3.45 फीसदी घटकर 163.54 लाख हेक्टेयर रह गई है, जबकि सामान्य क्षेत्रफल 200 लाख हेक्टेयर का है। इससे घरेलू उत्पादन घटने की आशंका है और विदेशी आयात पर निर्भरता बढ़ गई है।
उपभोक्ता मामले विभाग के हालिया आंकड़ों (30 जुलाई तक) के अनुसार, कई खाद्य तेलों की कीमतों में पहले ही भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है:
- सूरजमुखी तेल: पहले के ₹160.55/किग्रा से बढ़कर ₹189.56/किग्रा हुआ (18.07% की वृद्धि)।
- पाम तेल: ₹129.87/किग्रा से बढ़कर ₹148.60/किग्रा (14.42% की वृद्धि)।
- सोया तेल: ₹147.09/किग्रा से बढ़कर ₹164.62/किग्रा (11.92% की वृद्धि)।
- मूंगफली तेल: ₹188.83/किग्रा से बढ़कर ₹206.18/किग्रा (9.19% की वृद्धि)।
- सरसों तेल: ₹183.80/किग्रा से बढ़कर ₹196.46/किग्रा (6.89% की वृद्धि)।
आगामी महीनों में 8 से 12 फीसदी बढ़ोतरी के आसार, भारतीय आयातकों ने तलाशे नए विकल्प
सूरजमुखी तेल का मूल्य सूचकांक इस महीने 6 फीसदी तक चढ़ने के कारण अब मांग पाम और सोयाबीन तेल की तरफ मुड़ रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अल-नीनो के असर तथा इंडोनेशिया व मलेशिया द्वारा बायोफ्यूल में पाम तेल का इस्तेमाल बढ़ाने से वैश्विक स्टॉक पहले ही सीमित है। इन परिस्थितियों में विशेषज्ञों का अनुमान है कि आगामी महीनों में सभी प्रमुख खाद्य तेल 8 से 12 फीसदी तक और महंगे हो सकते हैं।
त्योहारों के दौरान बाजार में किल्लत न पैदा हो, इसके लिए भारतीय कारोबारियों ने आपूर्ति के नए विकल्प तलाशने शुरू कर दिए हैं। भारतीय आयातक अब अपनी सूरजमुखी तेल आपूर्ति का आधा हिस्सा दक्षिण अमेरिकी देश अर्जेंटीना से मंगा रहे हैं। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया से कैनोला तेल और अर्जेंटीना-ब्राजील से सोयाबीन तेल का आयात बढ़ाया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई में पाम तेल का आयात 40 फीसदी बढ़कर 7 लाख टन तक पहुंच सकता है।