अयोध्या : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए SIT पहुंची, 20 करोड़ से अधिक के चोरी का संदेह *XCVG* #999

संक्षिप्त विवरण

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच के लिए सोमवार दोपहर 3 बजे विशेष जांच टीम अयोध्या पहुंची। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद आई टीम ने जांच शुरू कर दी है। इस मामले में अब तक 5 आरोपियों के नाम सामने आए हैं और उनकी निशानदेही पर 2 करोड़ रुपये की बरामदगी की जा चुकी है। मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मामले में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने की बात कही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स ने 200 करोड़ से अधिक के चोरी की बात कही है। हालांकि पूरे मामले में केंद्र सरकार तक संपर्क साधे स्थानीय विधायक ने डीबीयूपी इंडिया को बताया कि "हमें लगभग 20 करोड़ के आंकड़े की आशंका है, कई संपत्तियों को जांच में कर्मचारी अपनी निजी बता रहे हैं।"


मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अयोध्या पहुंची एसआईटी की टीम

राम मंदिर में दान राशि की कथित चोरी के मामले में जांच को गति देने के लिए सोमवार को स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) दोपहर 3 बजे अयोध्या पहुंची। अयोध्या आने से ठीक पहले इस विशेष टीम ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की थी। इस उच्चस्तरीय टीम में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, आईजी किरन एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नीलरतन शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, टीम ने अयोध्या पहुंचते ही सीधे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यालय का रुख किया और वहां के अधिकारियों से मामले की प्रारंभिक जानकारी जुटानी शुरू कर दी।


ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और आमंत्रित सदस्य से पूछताछ

जांच टीम ने मंदिर ट्रस्ट के कार्यालय में पहुंचकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से मामले के संदर्भ में विस्तृत जानकारी ली। इसके साथ ही, ट्रस्ट के आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया, जिनसे करीब 2 घंटे तक गहन पूछताछ चली। पूछताछ के लिए पहुंचने के दौरान गोपाल राव को मीडिया कर्मियों ने भी घेरा, लेकिन उन्होंने इस विषय पर कोई भी आधिकारिक बयान देने से इनकार कर दिया। सूत्रों का दावा है कि चोरी के मामले में जिन कर्मचारियों पर संदेह जताया जा रहा है, उन्हें फिलहाल ट्रस्ट के ही एक कमरे में बैठाकर रखा गया है। इसके अतिरिक्त, एसआईटी की टीम उस आईपीएस (IPS) अधिकारी से भी इनपुट लेगी, जो पूर्व में दिल्ली से गुप्त जांच के लिए अयोध्या आए थे।

पांच आरोपी हिरासत में, अब तक 2 करोड़ रुपये की रिकवरी

इस कथित चढ़ावा चोरी मामले में अब तक मुख्य रूप से पांच लोगों के नाम प्रकाश में आए हैं, जिनमें लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रामशंकर शामिल हैं। खबरों के अनुसार, ये सभी व्यक्ति मंदिर में दान राशि की गिनती करने की ड्यूटी से जुड़े हुए थे। वर्तमान में लवकुश और अनुकल्प पुलिस की हिरासत में हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के तहत इन आरोपियों की निशानदेही पर अब तक कुल 2 करोड़ रुपये की भारी रकम बरामद की जा चुकी है।

नृपेंद्र मिश्र का बयान: सुधार और जांच दोनों साथ-साथ

राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अब इस मामले में किसी भी स्तर पर कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं का अटूट भरोसा बनाए रखने के लिए जांच और प्रशासनिक सुधार दोनों स्तरों पर तेजी से काम किया जा रहा है। दूसरी ओर, भाजपा नेता विनय कटियार ने भी मंदिर प्रबंधन के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके एक पूर्व दौरे के दौरान वहां तैनात कर्मियों का व्यवहार उचित नहीं था, और ऐसे माहौल में इस प्रकार की गड़बड़ियां सामने आना चिंताजनक है।

राजनीतिक बयानबाजी और सीबीआई जांच की मांग

इस मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने रविवार 7 जून को दावा किया था कि राम मंदिर से करीब 5 से साढ़े 7 करोड़ रुपये तक की चोरी की गई है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस विषय पर सरकार की चुप्पी को संदिग्ध बताते हुए मामले को अदालत के संज्ञान में ले जाने की बात कही थी। हालांकि, उस समय चंपत राय ने सफाई देते हुए कहा था कि अभी तक ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है। विवाद लगातार बढ़ता देख भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने 9 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस पूरे प्रकरण की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग की थी, जिसके ठीक अगले दिन यानी 10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की थी।

स्थानीय विधायक की डीबीयूपी इंडिया को सूचना

मामले में केंद्र सरकार तक पकड़ रखने वाले स्थानीय विधायक ने नाम ना छापने की शर्त पर डीबीयूपी इंडिया को बताया कि पूरा मामला अब सीएम योगी और गृह मंत्री तक निगरानी में है। मेरी जानकारी के अनुसार आंकड़ा 20 करोड़ तक पहुंचने की आशंका है। हालांकि SIT की जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। उन्होंने कहा की कई संपत्तियों को जांच में कर्मचारी अपनी निजी बता रहे हैं।

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