अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में एसआईटी की कार्रवाई, टिन्नू यादव के घर से करोड़ों का सोना मिला, 50 करोड़ की संपत्ति पर शक #889 *HHW*
संक्षिप्त विवरण:
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में मुख्यमंत्री द्वारा गठित एसआईटी ने जांच तेज कर दी है। कथित तौर पर ट्रस्ट के कर्मचारी टिन्नू यादव के घर से करोड़ों का सोना मिला है और उन पर 50 करोड़ की संपत्ति के संदिग्ध होने का दावा है, वहीं उन्होंने वीडियो जारी कर खुद को निर्दोष बताया है, उनका कहना है कि वह जमीन बहुत पुरानी है, किराए और व्यवसाय से पैसे कमाए हैं। वहीं, सोमेश आनंद की संदिग्ध यात्राओं और केडी तिवारी की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इससे पहले करोड़ों के मुकुट गायब हुए थे। मामले से जुड़े विश्वसनीय सूत्र ने डीबीयूपी इंडिया को बताया कि वर्तमान से सम्बंधित, 20 करोड़ से अधिक का आंकड़ा नहीं मिलेगा, मीडिया रिपोर्ट्स में इसे बढ़ाकर सैंकड़ों करोड़ दिखाया जा रहा है।
एसआईटी की पूछताछ और नकद बरामदगी
राम मंदिर के खजाने और चढ़ावे में गबन के बड़े आरोपों की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 15 जून 2026 (सोमवार) को अयोध्या पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी। टीम ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से करीब छह घंटे तक पूछताछ की और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की। मुख्य कार्रवाई से पहले ही पांच मुख्य संदिग्धों के पास से कथित तौर पर लगभग दो करोड़ रुपये नकद, एक लग्जरी कार और तीन आईफोन बरामद किए जा चुके हैं। मंदिर में रोजाना लगभग एक लाख श्रद्धालु आते हैं, जिनकी संख्या विशेष अवसरों पर तीन से चार गुना बढ़ जाती है, जिससे चढ़ावे का आंकड़ा काफी बड़ा होता है।
टिन्नू यादव के घर से करोड़ों का सोना जब्त और 50 करोड़ की संपत्ति का दावा
इस घोटाले में चंपत राय के करीबी माने जाने वाले ट्रस्ट कर्मचारी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू का नाम प्रमुखता से उभरा है। 13 जून 2026 (शनिवार) को ट्रस्ट और मंदिर सुरक्षा से जुड़े छह लोगों की टीम ने टिन्नू के पैतृक आवास (स्वर्गद्वार क्षेत्र) पर छापेमारी कर भारी मात्रा में शुद्ध सोना जब्त किया, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि 1992 में अयोध्या में ऑटो चलाने वाले टिन्नू के पास आज अयोध्या और लखनऊ में 50 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्तियां हैं, जिनमें अयोध्या इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास 70 कमरों वाला एक हॉस्टल भी शामिल है। सुरक्षा प्रबंधन और चढ़ावा जमा करने का जिम्मा संभालने वाले टिन्नू से फिलहाल पीसीएफ यात्री सुविधा केंद्र में पूछताछ की जा रही है।
आरोपों पर टिन्नू यादव की सफाई: संपत्ति के दावों को बताया भ्रामक
अपने ऊपर लगे आरोपों के बीच टिन्नू यादव ने एक वीडियो जारी कर 50 करोड़ की संपत्ति के दावों को झूठा और भ्रामक बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे 1988 में ओटीसी कर 1993 से विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और राम जन्मभूमि आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। टिन्नू के अनुसार, जिस जमीन और मकान पर सवाल उठ रहे हैं, वह जमीन 2008 में खरीदी गई थी और 2015 में वहां मकान बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि उनकी आय का स्रोत संगठन से मिलने वाला मानदेय, उनका ऑटोमोबाइल व्यवसाय और मंदिर निर्माण के दौरान एलएंडटी (L&T) की टीम को मकान किराए पर देना रहा है। उन्होंने सच का फैसला भगवान श्रीराम पर छोड़ दिया है।
निर्माण प्रभारी के भतीजे सोमेश आनंद की संदिग्ध यात्राएं राडार पर
इस मामले में मंदिर निर्माण के मुख्य प्रभारी गोपाल राव के रिश्ते में भतीजे लगने वाले सोमेश आनंद की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। कर्नाटक निवासी गोपाल राव ने ही 2023 में प्रभारी बनने के बाद सोमेश को मंदिर में नौकरी दिलवाई थी। सूत्रों के अनुसार, सोमेश ने एक साल के भीतर कर्नाटक समेत विभिन्न राज्यों की 50 से अधिक संदिग्ध यात्राएं की हैं। उनका यात्रा का तरीका जांच एजेंसियों को चौंका रहा है; वे कथित तौर पर बोरे में भारी सामान भरकर अयोध्या से ट्रेन से दक्षिण भारत जाते थे और फ्लाइट से खाली हाथ लौटते थे। दावा है कि ट्रेन में चेकिंग कम होने के कारण ऐसा किया जाता था। फिलहाल उनके बैंक खातों और हवाई टिकटों की बारीकी से जांच की जा रही है।
केडी तिवारी की सफाई और गायब हुए मुकुटों का पुराना रहस्य
रामलला के आभूषणों को संभालने वाले मुख्य प्रशासनिक अधिकारी केडी तिवारी भी जांच की जद में आ गए हैं। सुरक्षा अधिकारियों ने उनके आवास पर छापेमारी की है और हाल ही में उनके द्वारा खरीदी गई डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन के सौदे की भी जांच हो रही है। तिवारी ने अपनी सफाई में कहा है कि उनका काम सिर्फ श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए गहनों को तौलना, रसीद देना और ट्रस्ट के वरिष्ठों को सौंपना था; आगे क्या खेल होता था, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इस जांच के बीच दो साल पहले का एक मामला भी सुर्खियों में आ गया है जब सावन के झूला मेले के दौरान रामलला और उनके तीन भाइयों (भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न) के सोने के मुकुट गायब हो गए थे। ये मुकुट गाजियाबाद के एक श्रद्धालु ने अपनी मां के जेवर बेचकर बनवाए थे। पुजारियों की बार-बार मांग के बाद महीनों की खोजबीन के पश्चात ये मुकुट मंदिर परिसर में ही ट्रस्ट के एक पदाधिकारी की अलमारी से बरामद हुए थे।
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